फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फोन टैपिंग मामला: आईपीएस रश्मि शुक्ला के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज, गिरफ्तारी से फिलहाल मिली राहत

Fri, 04 Mar 2022 06:21 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

इससे पहले पुणे पुलिस ने कांग्रेस नेता नाना पटोले के फोन की कथित अवैध टैपिंग के संबंध में बुंद गार्डन पुलिस स्टेशन में रश्मि शुक्ला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
विज्ञापन
महाराष्ट्र की आईपीएस रश्मि शुक्ला - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

फोन टैपिंग के मामले में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला के खिलाफ दक्षिण मुंबई के एक पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें पुणे में दर्ज इसी तरह के एक मामले में गिरफ्तारी से राहत दी थी। रश्मि शुक्ला वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं और हैदराबाद में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) के रूप में तैनात हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि नई एफआईआर कोलाबा पुलिस थाने में भारतीय टेलीग्राफ कानून के अलावा अन्य संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई है। अधिकारी ने कहा कि कथित अवैध फोन टैपिंग तब हुई जब रश्मि शुक्ला महाराष्ट्र में राज्य के खुफिया विभाग (एसआईडी) की प्रमुख थीं।

विज्ञापन


पहले भी हो चुकी है एफआईआईआर दर्ज 
इससे पहले पुणे पुलिस ने कांग्रेस नेता नाना पटोले के फोन की कथित अवैध टैपिंग के संबंध में बुंद गार्डन पुलिस स्टेशन में रश्मि शुक्ला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। तब राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार थी। मुंबई क्राइम ब्रांच की साइबर विंग ने पहले भी एसआईडी प्रमुख के रूप में शुक्ला के कार्यकाल के दौरान पुलिस तबादलों के बारे में कथित फोन टैपिंग और गोपनीय दस्तावेजों के लीक होने पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था और उनका बयान भी दर्ज किया था। लेकिन मार्च 2021 में मुंबई के बीकेसी पुलिस स्टेशन में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत दर्ज इस प्राथमिकी में
उसका नाम आरोपी के रूप में नहीं था।

गिरफ्तारी पर 25 मार्च तक रोक 
इस बीच, बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पुणे पुलिस को रश्मि शुक्ला के खिलाफ 25 मार्च तक कोई भी कार्रवाई करने से रोक दिया। न्यायमूर्ति एस एस शिंदे और न्यायमूर्ति नितिन बोरकर की पीठ ने कहा कि शुक्ला को अगले आदेश तक गिरफ्तारी से संरक्षण दिया जाना चाहिए, क्योंकि पहली नजर में लगता है कि प्राथमिकी में उन्हें अकेले नामित किया गया था। अदालत ने शुक्ला के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी के तर्क पर ध्यान दिया कि हालांकि अवैध फोन टैपिंग की कथित घटना तीन साल पहले हुई थी, पुणे पुलिस की प्राथमिकी इस साल 25 फरवरी को ही दर्ज की गई थी। शुक्ला मार्च 2016 से जुलाई 2018 के बीच पुणे पुलिस कमिश्नर के पद पर तैनात थीं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें