मद्रास हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राजनीति आम आदमी और देश की भलाई के लिए की जानी चाहिए और अगर कोई राजनेता व्यक्तिगत लाभ हासिल करने के लिए लोगों के जीवन से खेलता है तो यह सत्ता का दुरुपयोग है और यह संवैधानिक आदर्शों के खिलाफ है।
न्यायमूर्ति एस एम सुब्रमण्यम ने आर गिरिजा द्वारा दायर अवमानना याचिका पर हालिया आदेश में ये टिप्पणियाँ कीं। सत्तारूढ़ द्रमुक की एक पदाधिकारी एस रामलिंगम ने अदालत के आदेशों के बावजूद दस साल से अधिक समय तक अपना घर खाली करने से इनकार कर दिया।
न्यायाधीश ने कहा कि राजनेता आम आदमी के जीवन में प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं। एक राजनेता के शब्दों और कार्यों का उसके अनुयायियों, पार्टी के लोगों और बड़े पैमाने पर जनता पर प्रभाव पड़ता है। यह जरूरी था कि इस शक्ति का दुरुपयोग अवैध और व्यक्तिगत लाभ के लिए न किया जाए।
न्यायाधीश ने कहा कि यह अदालत कुछ राजनेताओं द्वारा विशेष रूप से भूमि हड़पने के मामलों में बड़े पैमाने पर राजनीतिक शक्ति का शोषण देख रही है और यह एक अस्वस्थ लोकतंत्र का मार्ग प्रशस्त करेगा।
एक शक्तिहीन आम आदमी से जमीन हड़पने के लिए राजनीतिक शक्ति और प्रभाव का उपयोग करना दिन-दहाड़े डकैती से कम नहीं है। एक आम आदमी समाज के सामने शक्तिहीन लग सकता है। लेकिन हमारे महान राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक और उसके अधिकारों को संवैधानिक रूप से संरक्षित किया गया है।
न्यायाधीश ने कहा कि अदालतें दर्शक नहीं बनी रहेंगी, खासकर, जब अनुच्छेद 21 के तहत शांतिपूर्ण जीवन जीने के उसके अधिकार को खतरा हो। न्यायाधीश ने कहा कि राजनीतिक शक्ति का उपयोग केवल जनता के लाभ के लिए किया जाना चाहिए, न कि उनके नुकसान के लिए। न्यायाधीश ने कहा, जब राजनेताओं को आम जनता द्वारा ऐसी शक्ति दी गई है, तो इसका उपयोग सामाजिक रूप से लाभकारी मुद्दों के लिए किया जाना चाहिए, न कि स्वयं के लाभ के लिए समस्याएं पैदा करने के लिए।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि रामलिंगम ने पांच साल से अधिक समय से बकाया किराए का भुगतान अभी तक नहीं किया है। न्यायाधीश ने इस पर कहा कि वर्तमान अवमानना याचिका के मामले में, बुजुर्ग महिला को पुलिस की सहायता से अदालत के माध्यम से किरायेदार को खाली कराने में 12 साल लग गए।