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मद्रास हाईकोर्ट: एनएमसी को आदेश, अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए बनाएं 'पेशेवर कदाचार' की स्पष्ट सूची

Wed, 27 Oct 2021 06:24 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, चेन्नई

सार

अनुशासनात्मक कार्यवाही को किसी भी तरह की खामियों से मुक्त करने के लिए जांच समिति की रिपोर्ट को अंतिम और राज्य चिकित्सा परिषद, नैतिकता और चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड के अनुशासन बोर्ड के लिए बाध्यकारी बनाया जाए। रिपोर्ट में अगर चिकित्सक दोषी पाया जाए तो सक्षम प्राधिकरण दंड पर निर्णय ले सकता है।
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मद्रास हाईकोर्ट - फोटो : PTI
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विस्तार
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मद्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार को चिकित्सकों के खिलाफ शिकायतों के प्रभावी निपटाने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद (एनएमसी) अधिनियम, 2019 के तहत बनाए जाने वाले नए नियमों में शामिल करने के लिए 12 दिशा-निर्देशों का एक सेट जारी किया।

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न्यायमूर्ति आर महादेवन ने यह दिशानिर्देश इसी वर्ष चार मई को तमिलनाडु मेडिकल काउंसिल की तरफ से गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर पी बसुमनी को छह माह के लिए प्रैक्टिस से प्रतिबंधित करने के आदेश को रद्द करते जारी किए। पीठ ने कहा कि पंजीकृत चिकित्सक के कर्तव्यों को स्पष्ट करना चाहिए।

डॉक्टर से अपेक्षित सामान्य कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के साथ ही कुछ विशिष्ट कर्तव्यों और जिम्मेदारियों, जिनके उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी को भी सूची में साफ तौर पर ‘पेशेवर कदाचार’ के रूप में शामिल किया जाए। इसके बाद, एक पीड़ित व्यक्ति की तरफ से शिकायत दर्ज करने से लेकर उसके बाद की पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से राज्यवार पेश किया जाए।
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अनुशासनात्मक कार्यवाही को किसी भी तरह की खामियों से मुक्त करने के लिए जांच समिति की रिपोर्ट को अंतिम और राज्य चिकित्सा परिषद, नैतिकता और चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड के अनुशासन बोर्ड के लिए बाध्यकारी बनाया जाए। रिपोर्ट में अगर चिकित्सक दोषी पाया जाए तो सक्षम प्राधिकरण दंड पर निर्णय ले सकता है।

दोनों पक्षों को बात रखने का मिले अवसर
राज्य चिकित्सा परिषद, नैतिकता और चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड, जैसा भी मामला हो, दोषी चिकित्सक को कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है, जिस पर एक तय समय सीमा के भीतर विस्तृत से स्पष्टीकरण लिया जाए। स्पष्टीकरण के आधार पर विशेषज्ञों की जांच समिति बनाई जाए, जिसके बाद आरोपी चिकित्सक को नोटिस जारी किया जाए और दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाए।

शिकायतकर्ता को ही पुलिस जंजीर से बांधेगी तो क्या उसका विश्वास व्यवस्था में रहेगा?
‘शिकायत करने पुलिस स्टेशन आए नागरिक को ही तुम जंजीर से रेलिंग पर बांध दोगे तो क्या व्यवस्था में लोग विश्वास कर पाएंगे?’ केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को पुलिस से यह सवाल पूछा। उसने आश्चर्य जताते हुए कहा, इस नागरिक पर पुलिस अधिकारी के काम में बाधा डालने का मामला भी दर्ज कर दिया गया है! एक याचिका की सुनवाई में जस्टिस देवन रामचंद्रन ने कहा, ‘अगर ऐसे हालात हैं तो लोग पुलिस स्टेशन ही क्यों आना चाहेंगे?’ यह याचिका दायर करने वाले व्यक्ति ने दो पुलिस अधिकारियों के शोषण से बचाने का अदालत से निवेदन किया था। इनमें से एक अधिकारी ने ही उसे पुलिस स्टेशन में जंजीर से बांध दिया था क्योंकि उसने अपनी शिकायत की रसीद मांग ली थी।

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