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Madras: ‘कानूनी उत्तराधिकार प्रमाणपत्र के लिए गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ दर्ज करें एफआईआर’, HC का निर्देश

Tue, 14 May 2024 03:53 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मद्रास

सार

मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि गलत सूचना देने और तथ्यों को छिपाने वाले लोगों के खिलाफ सक्ष्म अधिकारियों को विवरण इकट्ठा करके शिकायत दर्ज कराना चाहिए। साथ ही पांच सप्ताह के भीतर सर्कुलर जारी किया जाना चाहिए।
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Court Room - फोटो : ANI
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विस्तार
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मद्रास हाईकोर्ट ने आज राजस्व प्रशासन आयुक्त को निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि अगर किसी ने भौतिक तथ्यों को छिपाकर या गलत जानकारी देकर कानूनी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की मांग के लिए आवेदन किया है तो उस पर मुकदमा दर्ज करने के लिए पूरे तमिलनाडु के सक्षम राजस्व अधिकारियों को निर्देश जारी करें। 

पहले जानिए, क्या है पूरा मामला

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न्यायमूर्ति एसएस सुब्रमण्यम ने यह निर्देश एम मारान्नान द्वाया दायर एक याचिका का निपटारा करते हुए दिया। दरअसल, मारान्नान ने कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था, जिसे मेट्टुपालयम, कोयंबटूर के तहसीलदार ने खारिज कर दिया था। इसी आदेश को चुनौती देने के लिए मारान्नान ने हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने हाईकोर्ट से तहसीलदार के आदेश को रद्द करने की मांग की थी। बता दें, मारान्नान ने आवेदन दायर करते हुए कहा था कि दिवंगत माराना गौडर का एकमात्र कानूनी अधिकारी वही है। राजस्व अधिकारी ने जब जांच की तो पता चला कि मृतक के चार कानूनी उत्तराधिकारी हैं, जिसमें उनके दो बेटे और दो बेटियां शामिल हैं। मृतक के चारों उत्तराधिकारी जीवित हैं। तथ्य छिपाते हुए खुद को मृतक का उत्तराधिकारी बताने के कारण राजस्व अधिकारी ने मारान्नान के आवेदन को खारिज कर दिया। इसी आदेश के खिलाफ मारान्नान ने उच्च न्यायालय का रुख किया। 

अदालत ने की यह टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि गलत सूचना देने और तथ्यों को छिपाने वाले लोगों के खिलाफ सक्ष्म अधिकारियों को विवरण इकट्ठा करके शिकायत दर्ज कराना चाहिए। इसी के साथ पांच सप्ताह के भीतर सर्कुलर जारी किया जाना चाहिए। मामले में न्यायाधीश ने कहा कि अगर आपराधिक कानून के तहत सक्षम राजस्व अधिकारी मुकदमा दर्ज कराने में विफल होते हैं तो उन अधिकारियों के खिलाफ काम में लापरवाही और चूक का मामला दर्ज किया जाना चाहिए।   

अदालत ने कहा कि हमारे यहां ऐसे कई मामले आ रहे हैं, जहां कानूनी उत्तराधिकार प्रमाणपत्र हासिल करने के उद्देश्य से लोग गलत जानकारी और तथ्य छिपा रहे हैं। सार्वजनिक डोमेन में बड़े पैमाने पर अवैधताएं और अनियमितताएं देखी जा रही हैं। कानूनी उत्तराधिकार प्रमाणपत्र के लिए गलत जानकारी देना और तथ्य छिपाना भारतीय दंड संहिता के तहत एक अपराध है।

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