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मध्यप्रदेश: कैलाश विजयवर्गीय के इस बयान के पीछे ये है असल राजनीति, कहीं क्षत्रपों को साधने की कोशिश तो नहीं?

राहुल संपाल
Updated Thu, 28 Sep 2023 03:51 PM IST

सार

प्रदेश की राजनीति में इंदौर जिले को अहम माना जाता है। इंदौर जिले में कुल 9 विधानसभा सीटें हैं। 9 सीटों में 6 सीटों पर भाजपा के विधायक हैं, जबकि 3 सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया हुआ है। इन सभी सीटों में से सबसे वीआईपी सीट इंदौर-1 को माना जाता है...
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Kailash Vijayvargiya - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht


यह कहता है इंदौर क्षेत्र क्रमांक 1 सीट का गणित

प्रदेश की राजनीति में इंदौर जिले को अहम माना जाता है। इंदौर जिले में कुल 9 विधानसभा सीटें हैं। 9 सीटों में 6 सीटों पर भाजपा के विधायक हैं, जबकि 3 सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया हुआ है। इन सभी सीटों में से सबसे वीआईपी सीट इंदौर-1 को माना जाता है। यहां से भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को चुनावी मैदान में उतारा गया है। विजयवर्गीय इंदौर की अलग-अलग सीटों से चुनाव लड़ चुके हैं। वे शहर के उन नेताओं में से हैं जो कभी चुनाव नहीं हारे हैं। इस सीट से कांग्रेस के नेता संजय शुक्ला पिछली बार चुनाव जीते थे। संजय शुक्ला 2018 के चुनाव में विधानसभा क्रमांक-01 से पहली बार विधायक बने थे। उन्होंने भाजपा नेता सुदर्शन गुप्ता को 8163 वोटों से चुनाव हराया था। 2018 में चुनाव में जीत हासिल करने के बाद शुक्ला ने इस क्षेत्र में अच्छी पकड़ बनाई और विकास के काम तेजी से करवाए।

विधानसभा क्रमांक-1 पर अधिकांश भाजपा का कब्जा रहा है। इस क्षेत्र में यादव और ब्राह्मण समाज का खासा वर्चस्व है, इसलिए यहां कांग्रेस ने संजय शुक्ला पर दाव खेला था। हालांकि जैन समुदाय के मतदाता भी हार जीत में बड़ी भूमिका निभाते हैं। 2013 में यहां भाजपा से सुदर्शन गुप्ता को 99558 वोट देकर मतदाताओं ने विजय दिलाई थी। वहीं निर्दलीय कमलेश खंडेलवाल को 54176 वोटों के अंतर से हराया था। जबकि कांग्रेस के दीपू यादव को 37595 मतों से ही संतोष करना पड़ा था। विजयवर्गीय का विधानसभा क्रमांक-1 से उम्मीदवार तय होना यह संकेत देता है कि ये सीट भाजपा के लिए कितनी मुश्किल सीट थी। यानी मौजूदा विधायक संजय शुक्ला ने पांच सालों में काम तो किया है। विजयवर्गीय इंदौर की अलग-अलग सीटों से चुनाव लड़ चुके हैं। कैलाश विजयवर्गीय उन नेताओं में से हैं जो कभी चुनाव में पराजित नहीं हुए हैं।

वर्तमान विधायक से हो सकता है कैलाश का मुकाबला

इस सीट पर भाजपा ने जरूर अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया हो, लेकिन अभी तक कांग्रेस ने इस सीट पर उम्मीदवारी घोषित नहीं की है। हालांकि कांग्रेस इस सीट से फिर से वर्तमान विधायक संजय शुक्ला पर ही दांव लगाएगी। शुक्ला इससे पहले शहर का महापौर चुनाव भी लड़ चुके हैं, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। शुक्ला धनाढ्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता विष्णु प्रसाद शुक्ला भाजपा के कद्दावर नेता रहे हैं। विष्णु प्रसाद शुक्ला 70 के दशक में भाजपा संगठन से जुड़े थे। शहर में वे बड़े भैया के नाम से जाने जाते थे। दो बार विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं पाए। विष्णु प्रसाद शुक्ला हमेशा चाहते थे कि उनके परिवार से कोई विधायक बने। उनकी यह हसरत 2018 के विधानसभा चुनाव में छोटे बेटे संजय शुक्ला ने पूरी की थी। संजय शुक्ला कांग्रेस के टिकट से एक नंबर विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने।

क्या बयान दिया था विजयवर्गीय ने?

दरअसल, भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी की थी। 39 उम्मीदवारों वाली दूसरी लिस्ट में भाजपा ने इंदौर-1 सीट से अपने राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को भी मैदान में उतारा है। विजयवर्गीय की टिकट की घोषणा होने के बाद क्षेत्र क्रमांक एक के कई नेताओं के मंसूबों पर पानी फिर गया है। इस क्षेत्र से पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता, मंत्री उषा ठाकुर, सौगात मिश्रा, टीनू जैन, अमरदीप मौर्य, गोलू शुक्ला टिकट की दावेदारी कर रहे थे। टिकट दिए जाने के बाद भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पार्टी ने मुझे टिकट दिया है, लेकिन ईमानदारी से कहूं तो मैं अंदर से खुश नहीं हूं, क्योंकि मैं चुनाव नहीं लड़ना चाहता, एक फीसदी भी नहीं।

विजयवर्गीय ने कहा था कि एक माइंडसेट होता है, चुनाव न लड़ने का। अपने को तो जाना है, भाषण करना है...अब बड़े नेता हो गए, हाथ जोड़ने का कहा जाएगा...तो भाषण देना और निकल जाना...ये सोचा था हमने तो...। उन्होंने कहा कि हमने इस चुनाव के दौरान हर दिन आठ सार्वजनिक बैठकों (सभा) की योजना बनाई थी, जिसमें हेलीकॉप्टर से पांच, कार से तीन बैठकें शामिल थीं। लेकिन जैसा आप सोचते हैं वैसा हमेशा नहीं होता है, इसलिए यह भगवान की इच्छा थी कि मैं चुनाव लड़ूं।

यहीं नही विजयवर्गीय ने यह भी कहा था कि मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि मुझे टिकट मिला है और मैं दावेदार हूं। हालांकि मैंने कहा था कि मैं चुनाव नहीं लड़ना चाहता, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने परसों (सोमवार) मुझे कुछ निर्देश दिए। मैं असमंजस में था और घोषणा होने के बाद मैं आश्चर्यचकित रह गया। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे चुनावी राजनीति में भाग लेने का अवसर मिला। मैं पार्टी की अपेक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करूंगा।

दूसरी लिस्ट में तीन केंद्रीय मंत्रियों को भी बनाया प्रत्याशी

भाजपा की दूसरी लिस्ट में तीन केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। इनमें केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और ग्रामीण विकास और इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते शामिल हैं। कृषि नरेंद्र सिंह तोमर दिमनी सीट से चुनाव लड़ेंगे, वहीं प्रहलाद सिंह पटेल नरसिंहपुर, जबकि फग्गन सिंह कुलस्ते निवास से चुनाव लड़ेंगे। इसके अलावा पार्टी ने जबलपुर सांसद राकेश सिंह, सीधी सांसद रीति पाठक, सतना सांसद गणेश सिंह और होशंगाबाद सांसद से उदय प्रताप सिंह को भी चुनावी मैदान में उतारा है।

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