फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

मध्यप्रदेश: दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल की दावत ने बढ़ाई राजनीतिक सरगर्मियां, सियासी हलकों में नेतृत्व परिवर्तन की आहट!

राहुल संपाल
Updated Mon, 22 Nov 2021 03:53 PM IST

सार

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कुछ दिन पहले भाजपा के दो नेताओं का नाम सीएम की दौड़ के लिए सबसे आगे बताया था। सिंह ने जुलाई में ट्वीट कर कहा था 'अब मध्यप्रदेश भाजपा में मुख्यमंत्री के लिए केवल दो ही उम्मीदवार दौड़ में रह गए हैं। पीएम मोदी के उम्मीदवार हैं प्रहलाद पटेल और संघ के उम्मीदवार हैं बीडी शर्मा...
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रहलाद सिंह पटेल - फोटो : Amar Ujala


पार्टी में शामिल हुए लोगों को बतौर उपहार मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले का गुड़ भी भेंट किया गया। उपहार के पैकेट पर केंद्रीय मंत्री के भाई और प्रदेश से विधायक जालम सिंह पटेल का नाम लिखा था। प्रहलाद पटेल भाजपा के लिए लंबे समय तक संगठन का काम कर चुके हैं। मध्यप्रदेश के कद्दावर नेता पटेल ने पूर्व सीएम उमा भारती के साथ भाजपा छोड़ी थी। बाद में वापसी हुई तो अब दिल्ली में मोदी-शाह के करीबी माने जाते हैं। दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में कयास तेज हैं कि मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रुप में पटेल की दावेदारी भी खासी मजबूत है। हाईकमान उन पर भरोसा भी जता सकता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ओबीसी वर्ग से ताल्लुक रखते हैं और पटेल भी ओबीसी हैं। ऐसे में शिवराज सिंह को हटाकर पटेल को बैठाने से वह वर्ग भी नाराज नहीं होगा। नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को दिवाली मिलन की इस दावत ने खासा बल दे दिया है। बात इसलिए भी दूर तक जा रही है कि क्योंकि आमतौर पर पटेल अब तक ऐसी दावतों से दूर रहते ही नजर आते थे।

पटेल की दावेदारी के लिए दिग्विजय सिंह का भी आया था ट्वीट

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कुछ दिन पहले भाजपा के दो नेताओं का नाम सीएम की दौड़ के लिए सबसे आगे बताया था। सिंह ने जुलाई में ट्वीट कर कहा था 'अब मध्यप्रदेश भाजपा में मुख्यमंत्री के लिए केवल दो ही उम्मीदवार दौड़ में रह गए हैं। पीएम मोदी के उम्मीदवार हैं प्रहलाद पटेल और संघ के उम्मीदवार हैं बीडी शर्मा। बाकी उम्मीदवारों के प्रति मेरी सहानुभूति है। मामू का जाना तय'।



उत्तराखंड, कर्नाटक, गुजरात के बाद एमपी में कांग्रेस लगातार शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री बने रहने पर सवाल उठा रही है और मुख्यमंत्री का चेहरा बदलने को लेकर लगातार सोशल मीडिया पर कैंपेन चला रही है।

पेगासस लिस्ट में नाम से चर्चा में आए प्रह्लाद पटेल

पेगासस लिस्ट में विपक्ष के नेताओं के साथ मोदी कैबिनेट के दो मंत्रियों के नाम भी सामने आए थे। उनमें केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रहलाद सिंह पटेल शामिल थे। लिस्ट में नाम आने के बाद केंद्रीय राज्यमंत्री पटेल ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा था, मैं इतना बड़ा आदमी नहीं हूं कि मेरी जासूसी की जाए।



केंद्रीय राज्यमंत्री पटेल का राजनीतिक करियर छात्र नेता के तौर पर शुरू हुआ था। उन्होंने मध्यप्रदेश के जबलपुर विश्वविद्यालय में छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव जीतकर सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा था। इसके बाद उन्होंने राजनीति में पलट कर नहीं देखा और लगातार आगे बढ़ते गये। पटेल उन गिने चुने राजनेताओं में से हैं जिन्होंने नर्मदा परिक्रमा की है। पटेल चार बार सांसद रह चुके हैं। पहली बार वे 1989 में सांसद बने थे। इसके बाद 1996, 1999, 2014 और 2019 में भी सांसद बने।


पटेल वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में भी मंत्री रहे हैं। साल 2003 उमा भारती की अगुवाई में दिग्विजय सिंह की एक दशक पुरानी कांग्रेस सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था, तो पटेल को राज्य स्तर पर पहचाना मिली। अपनी तेज-तर्रार छवि के चलते ही वह अटल बिहारी वाजपेयी की पसंदीदा नेताओं में शुमार होने लगे और बाद में उन्हें वाजपेयी सरकार में कोयला मंत्री बना दिया गया। यहां से वह राज्य से निकलकर केंद्र की तरफ बढ़ चले।

प्रहलाद पटेल का केंद्रीय मंत्रिमंडल में घटा कद

जुलाई में हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में प्रहलाद पटेल का कद कम कर दिया गया। पटेल से पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय स्वतंत्र प्रभार छीनकर उन्हें जलशक्ति व खाद्य प्रसंस्करण का राज्यमंत्री बनाया गया है। पटेल का मंत्रालय बदलने और उनके अधिकार सीमित किए जाना उनकी कार्यशैली और दमोह उपचुनाव में मिली भाजपा की करारी हार से जोड़कर देखा जा रहा है।  

शिवराज विरोधी माने जाते है पटेल

प्रहलाद पटेल को शिवराज विरोधी खेमे का नेता भी माना जाता है। साल 2005 में जब उमा भारती पर दंगों के आरोप लगे तो पार्टी ने शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दे दी। इसके बाद उमा भारती ने साल 2005 में अपना राजनीतिक दल भारतीय जनशक्ति पार्टी बनाया। पटेल ने बगावती तेवर दिखाते हुए उमा भारती का साथ दिया। उनके इस कदम के बाद से वह शिवराज विरोधी माने जाने लगे। कुछ ही समय के बाद पटेल ने पार्टी छोड़ दी और 2009 में फिर से भाजपा में लौट आए। साल 2014 में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में दमोह लोकसभा सीट से चुनाव जीता और 2019 में भी अपनी सीट बरकरार रखी।

और पढ़ें...
विज्ञापन
विज्ञापन
Next