रेलवे की गिरती आय से मंत्रालय की चिंता बढ़ती जा रही है। ऐसे में रेलवे बोर्ड कुछ कड़े फैसले ले सकता है। रेलवे ने सभी पैसेंजर ट्रेनों के साथ ही एक्सप्रेस ट्रेनों में टिकट लेकर चलने वालों की स्थिति का आकलन कराया है। विशेष पैसेंजर ट्रेनों में यात्रियों की संख्या की स्थिति को शामिल किया गया है। रेलवे आय बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। इसमें किराया वृद्धि भी शामिल है।
ट्रेन में अधिक से अधिक यात्रियों की टिकट लेकर सफर करने की आदत डालने के लिए सघन टिकट चेकिंग अभियान भी चलाए जा रहे हैं। टिकट चेकिंग अभियान के लिए एक प्वाइंट बनाकर सभी गाड़ियों को चेक कराया जा रहा है। जिससे उनमें चलने वाले यात्रियों की सही संख्या का अनुमान लगाया जा सके। इस प्रकार से जिन गाड़ियों टिकट की सेल होगी उन्हें बंद किए जाने की संभावना है।
मंडल में चलने वाली कई पैसेंजर गाड़ियां ऐसी हैं जिनमें यात्रियों की आक्यूपेंसी (टिकट लेने वाले यात्रियों की संख्या) बीस फीसदी से भी कम है। जबकि कई ऐसी हैं जिनमें 15 फीसदी से कम यात्री सफर रहे हैं।
मंडल में चलने वाली कई पैसेंजर गाड़ियों में यात्रियों की आक्यूपेंसी 85 फीसदी से कम है। इनके संचालन पर रेलवे को घाटा उठाना पड़ता है। जो हर महीने लाखों में होता है। इन गाड़ियों में नियमित टिकट चेकिंग भी नहीं होती, जिसके चलते बिना टिकट सफर करने वालों की संख्या भी बढ़ रही है।