इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच लोकपाल को कुल 55 शिकायतें मिली हैं। इसमें तीन सांसद हैं, जिनके खिलाफ लोकपाल से शिकायत की गई है। लोकपाल सार्वजनिक पदाधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में जांच करने वाली शीर्ष संस्था है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, कुल शिकायतों में से 22 ग्रुप ए और बी श्रेणी के केंद्र सरकार के अधिकारी, 26 विभिन्न बोर्ड, निगम और स्वायत्त निकायों के अध्यक्षों, सदस्यों व कर्मचारियों के खिलाफ थी, जो केंद्र द्वारा पूर्ण या आंशिक रूप से वित्तपोषित थे। इसके अलावा चार अन्य श्रेणी में थी। प्रारंभिक जांच के बाद 28 शिकायतों को निपटाया गया। 13 शिकायतों में लोकपाल ने प्रारंभिक जांच के आदेश दिए, जिसमें 12 की जांच केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और एक की जांच सीबीआई करेगी।
इसी तरह 2019-20 के दौरान लोकपाल को 1,427 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 613 राज्य सरकार के अधिकारियों और 4 केंद्रीय मंत्रियों और संसद सदस्यों से संबंधित थी। गौरतलब है कि जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष ने पिछले साल 23 मार्च को देश के पहले लोकपाल के तौर पर शपथ ली थी। जबकि लोकपाल के आठ सदस्यों ने 27 मार्च को शपथ ली थी।