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लोकनीति-सीएसडीएस सर्वे: दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में बेरोजगारी बड़ी समस्या, 45 फीसदी युवा बोले- घटे रोजगार के अवसर

Wed, 17 Mar 2021 03:05 PM IST
Harendra Chaudhary राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मध्य भारत में 29 फीसदी, उत्तर भारत में 34 फीसदी और दक्षिण भारत में 16 फीसदी युवाओं को मानना है कि देश में बेरोजगारी बड़ी समस्या बनकर उभर रही है...
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नौकरी के लिए साक्षात्कार - फोटो : iStock (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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विस्तार
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देश में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर आज देश का युवा सबसे ज्यादा परेशान नजर आ रहा है। आज युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती नई नौकरी तलाशना है। गांवों और शहरों में रहने वाले युवाओं का मत है कि पहले की तुलना में आज नौकरी खोजना बहुत ही मुश्किल काम हो गया है। ये तथ्य लोकनीति-सीएसडीएस की ओर से कराए गए सर्वे में सामने आए हैं।

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लोकनीति-सीएसडीएस ने 18 से 34 आयु वर्ग के लोगों के बीच 2019 में एक सर्वे करवाया गया था। इस सर्वे में जब युवाओं से देश में सबसे बड़ी समस्या के बारे में पूछा गया, तो सबसे ऊपर बेरोजगारी थी। मध्य भारत में 29 फीसदी, उत्तर भारत में 34 फीसदी और दक्षिण भारत में 16 फीसदी युवाओं को मानना है कि देश में बेरोजगारी बड़ी समस्या बनकर उभर रही है।

इनमें सबसे ज्यादा दिल्ली 50 फीसदी, तेलंगाना में 40 फीसदी, हरियाणा में 39 फीसदी, पंजाब में 36 फीसदी, मध्यप्रदेश में 30 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 30 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 27, महाराष्ट्र में 19, गुजरात में 21, राजस्थान में 35 और बिहार में 25 फीसदी युवाओं ने बेरोजगारी को आज के दौर की सबसे बड़ी समस्या करार दिया है।
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सर्वे में जब युवाओं से पूछा गया कि मोदी सरकार के आने के बाद देश में रोजगार के अवसर बढ़े हैं या घटे हैं तो 45 फीसदी युवाओं का मत था कि देश में रोजगार के अवसर पहले की तुलना में कम हुए हैं। जबकि 28 फीसदी युवाओं का कहना था कि केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद देश में रोजगार में अवसर बढ़े हैं। वहीं 21 फीसदी युवाओं का मत है कि देश में रोजगार की स्थिति को लेकर कोई बदलाव नहीं आया है।

इस सर्वे में 49 फीसदी युवाओं का कहना है कि पिछले तीन से चार सालों में नौकरी खोजना बहुत मुश्किल हो गया है। गांव और छोटे कस्बों में रहने वाले 49 फीसदी युवा भी मानते हैं कि रोजगार के अवसर कम हो हुए हैं। वहीं शहरों में रहने वाले 51 फीसदी युवा भी मानते हैं कि शहरों में भी रोजगार मिलना मुश्किल हो गया है। सर्वे में 62 फीसदी युवाओं ने माना कि देश में बेरोजगारी एक बेहद गंभीर समस्या है। वहीं, 25 फीसदी ने इसे 'थोड़ी-बहुत गंभीर' समस्या बताया है।

लोकनीति-सीएसडीएस के राजनीतिक शोधकर्ता मंजेश राणा ने अमर उजाला को बताया कि आज भारत में युवाओं की तादाद दूसरे देशों की तुलना में सबसे ज्यादा है। केंद्र सरकार हो या फिर राज्य सरकार उन्हें युवाओं को शिक्षा एवं स्वास्थ्य की सुविधाओं देने के साथ रोजगार भी उपलब्ध करवाना होगा। आज लोगों को अच्छी शिक्षा तो मिल रही है लेकिन रोजगार नहीं मिल पा रहा है। अगर ऐसी ही स्थिति चलती रही तो देश में बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा बनेगा। वहीं कोरोना के कारण हालात पहले से ज्यादा खराब हो गए हैं। अब युवाओं के लिए नौकरी खोजना किसी चुनौती से कम नहीं है।

उन्होंने आगे कहा, लोकनीति-सीएसडीएस 2016 के सर्वे में भी 19 फीसदी युवाओं का मानना था कि देश में नौकरियों की कमी है और बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है। 2019 के सर्वे में यह बढ़कर 25 फीसदी हो गई है। 2016 में तीन में दो युवाओं का मत था कि वे प्राइवेट से ज्यादा सरकारी नौकरी करना पसंद करेंगे। वहीं केवल 10 में से 1 व्यक्ति ही प्राइवेट नौकरी के पक्ष में था।

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