2024 लोकसभा चुनाव की तैयारियों में बेहद आक्रामक तरीके से जुटी भाजपा में प्रत्याशियों के नामों पर विचार-विमर्श शुरू हो चुका है। 2014 और 2019 में प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली भाजपा अब तीसरी बार जीत की हैट्रिक लगाने के मूड में है। इसके लिए मुद्दों के साथ-साथ प्रत्याशियों के नामों पर भी विचार-विमर्श शुरू हो चुका है। हाल ही में दिल्ली में हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक में लोकसभा चुनाव का पूरा खाका खींच लिया गया है और हर प्रदेश अध्यक्ष को अपने-अपने राज्यों में पार्टी का लक्ष्य देकर उन्हें चुनाव के लिए जुट जाने का निर्देश दिया गया है।
माना जा रहा है कि जीत के लिए भाजपा इस बार टिकटों के दावेदारों में भी बड़ा फेरबदल कर सकती है। छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश के संकेतों से माना जा रहा है कि इस बार लोकसभा चुनाव में जमे-जमाए पार्टी के बड़े चेहरों को टिकट से हाथ धोना पड़ सकता है तो नए युवा और महिला चेहरों को टिकटों में प्राथमिकता मिल सकती है। नोएडा से भी महिला प्रत्याशी को उतारने की चर्चा है। प्रमुख नामों में बुलंदशहर की जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. अंतुल तेवतिया का नाम शामिल है। वह निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गई थीं। वहीं, पार्टी महासचिव और दलित चेहरे दुष्यंत गौतम को बुलंदशहर से उतारा जा सकता है। हालांकि, वे अपने लिए पार्टी से दिल्ली की उत्तरी-पश्चिमी सीट मांग रहे हैं।
सुनील बंसल की तैनाती से बड़े संकेत
भाजपा की जीत में उत्तर प्रदेश की भूमिका बेहद अहम होने वाली है, लिहाजा यूपी के समीकरणों को साधने के लिए पार्टी ने अपने सबसे मजबूत रणनीतिकार सुनील बंसल को एक बार फिर यूपी में जीत दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी है। स्वयं पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा लखनऊ पहुंचकर तैयारियों का जायजा ले रहे हैं। आज भी उन्होंने लखनऊ में प्रधानमंत्री आवास योजना की एक लाभार्थी से मुलाकात किया है।
इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में एक लाभार्थी से मिलकर पीएम आवास योजना के महत्त्व को रेखांकित करने का प्रयास किया था। प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा का आवास योजना के लाभार्थियों से मिलने से माना जा रहा है कि भाजपा इस योजना में तेजी आगामी लोकसभा चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित करना चाहती है।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विचार
पीएम नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण कानून लाकर महिलाओं के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। इसको और धार देने के लिए आगामी लोकसभा चुनाव में ज्यादा महिला प्रत्याशियों को उतारकर विपक्षी खेमे को दबाव में लाने की रणनीति भी अपनाई जा सकती है। जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक में भी महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के मुद्दे पर प्रमुखता से चर्चा हुई है। अभी यूपी की 80 लोकसभा सीटों में 11 महिला सांसद हैं। इस संख्या को बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है।