बारामती के सबसे व्यस्त चौराहों में से एक भिगवान चौक पर सियासी हलचल खूब हो रही है। नगर परिषद की बिल्डिंग के सामने बने भवन में एक किनारे पर अजीत पवार की एनसीपी का कार्यालय है, तो बिल्डिंग के दूसरे छोर पर शरद पवार की एनसीपी का कार्यालय बना है। इसी बिल्डिंग के किनारे बहुजन समाज पार्टी ने अपना मंच सजाया है। चुनाव खत्म होने से एक रोज पहले दोनों पवार अपनी पॉवर दिखाने की होड़ में लगे हैं। सियासी चौराहे में तब्दील हो चुके भिगवान चौक पर खड़े सचिन पवार ने सियासत की बात शुरू होते ही भड़कना शुरू कर दिया। वह कहते हैं कि इस इस सियासत ने तो ऐसी खिचड़ी पकाई है कि कुछ समझ ही नहीं आता। बहुत गुस्सा आता है ऐसी राजनीति पर। कौन किधर गया है कुछ पता ही नहीं चलता है। सचिन कहते हैं कि कॉमन मैन को तो इन राजनेताओं ने ब्राइकेट में कर दिया है। मतलब कॉमन मैन की तो कोई सुन ही नहीं रहा। सब लोग अपने सियासी एजेंडे को सेट किए जा रहे हैं। सब खिचड़ी कर दिया है। हमारी लोकसभा में और पूरे प्रदेश में वोटर इतना कंफ्यूज है कि पूछिए मत। नाराज होकर सचिन कहते हैं कि महाराष्ट्र की सियासत में एक मुखौटा होता था। वह अब किधर है किसी को समझ नहीं आता है।
बारामती चौराहे से निकल रही मोटरसाइकिल रैली से बचते हुए चौराहे के किनारे पर खड़े विवेक कहते हैं कि शरद पवार के साथ जो हुआ वह ठीक नहीं हुआ। उनका कहना है कि अजीत पवार को पूरी ताकत शरद पवार ने दी थी। लेकिन अजित दादा ने क्या किया वह पूरे देश को पता है। उन्होंने तो ऐसा भरोसा तोड़ा है कि लोगों को ही विश्वास नहीं हो रहा है। और अजित दादा ने यह सब भारतीय जनता पार्टी के कहने पर किया है। वह आरोप लगाते हुए कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने जो दरार डाली है उसके लिए तो उसको ही भुगतना पड़ेगा। यही वजह है कि इस बार सिर्फ बारामती ही नहीं, बल्कि समूचे महाराष्ट्र की जनता शरद पवार के साथ भावनात्मक रूप से मजबूती से खड़ी है। हालांकि विवेक पवार फैमिली को एकजुट होते और लोकसभा चुनाव में सुप्रिया ताई को जीतते हुए देखना चाहते हैं। जबकि विधानसभा चुनाव के अजीत पवार के हाथों में ताकत देने की बात करते हैं।
बारामती के रहने वाले नागसेन तुलसे कहते हैं कि मेरा वोट तो उस नेता के लिए जाएगा, जो हमारे बारामती में मूलभूत समस्याओं को दूर करेगा। उनका कहना है कि इलाके में पानी का बड़ा संकट है। इससे लोगों का जीवन प्रभावित होता है। वह चाहते हैं कि उनका सांसद इस समस्याओं का निदान करे। इसके अलावा स्थानीय सरकार से भी मांग करते हैं कि इन समस्याओं को दूर किया जाए। लेकिन नागसेन अपनी इन समस्याओं के साथ सियासत में हुए बंटवारे पर भी बहुत करीब से नजर रखते हैं। वह कहते हैं कि महाराष्ट्र में जिस तरीके से बंटवारे की सियासत शुरू हुई है, वह ट्रेंड ठीक नहीं है। खासतौर से बारामती के इलाके में पवार वर्सेस पवार की जो लड़ाई हो रही है, उससे यहां के लोग कन्फ्यूज है। इसका कारण बताते हुए वह कहते हैं कि अगर लोग शरद पवार के साथ जाना चाहते हैं, तो चुनाव चिन्ह ने कन्फ्यूज कर दिया है। क्योंकि एनसीपी का चुनाव चिन्ह अजित दादा के पास है। अब ग्रामीण इलाकों में कम पढ़े-लिखे लोग अगर शरद पवार के साथ जाना भी चाहें, तो कितनों को आप बदले हुए चुनाव चिन्ह के बारे में बता पाओगे। इसलिए महाराष्ट्र की सियासत में घालमेल हो गया है इस बार।
बारामती के ही रहने वाले कालिदास दडवी कहते हैं कि उनके इस इलाके में शरद पवार और अजीत पवार को कभी अलग देखा ही नहीं गया। अभी चुनाव में चाचा भतीजे अलग हो गए। भाभी और नंद आपस में चुनाव लड़ रही हैं। पूरी जिंदगी बारामती में गुजारने और पवार परिवार को एक ही नजर से देखने वाले हम जैसे लोगों के लिए बड़ा संकट हो गया है। हम तो यही चाहते हैं कि यह परिवार एक होकर एक ही सियासत को आगे बढ़ाए। कालिदास उम्मीद करते हैं कि आज नहीं तो कल यह परिवार एक हो ही जाएगा। लेकिन अब इस चुनाव में उनके लिए यह बड़ी चुनौती है कि वह वोट किसे दें। हालांकि उनका कहना है कि जिस तरीके से देश में विकास हो रहा है, दुनियाभर में भारत का डंका बज रहा है। इसलिए वह विकास के नाम पर मोदी को वोट देना चाहते हैं। लेकिन भारतीय जनता पार्टी का तो कोई बारामती से लड़ नहीं रहा है, इस सवाल पर कालिदास कहते हैं कि हम अजीत पवार के साथ खड़े होकर मोदी को मजबूत करेंगे। वह कहते हैं कि मोदी के साथ जुड़ने पर अजित पवार ने इलाके का विकास भी किया है।
बारामती की ही सुरेखा दडवी कहती हैं कि चाहती तो वह भी हैं कि पवार परिवार एक हो जाए। लेकिन बात जब वोट देने की आती है, तो वह विकास का सबसे बड़ा मुद्दा सामने रखती हैं। महंगाई के सवाल पर सुरेखा और कालिदास कहते हैं कि महंगाई बहुत बड़ी समस्या है देश के सामने, लेकिन वह रुकने वाली नहीं है। सुरेखा को उम्मीद है कि सरकार महंगाई पर लगाम लगाएगी। लेकिन अभी जिस तरीके से केंद्र सरकार ने विकास का एक मॉडल तैयार किया है, वह उनको पसंद आ रहा है।