फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

BJP: यहां 10 लोकसभा चुनाव लगातार हार चुकी है कांग्रेस, अब विपक्ष को AAP से उम्मीद

Sun, 25 Feb 2024 03:19 PM IST
अमित शर्मा अमित शर्मा

सार

भाजपा नेता चंदूभाई देशमुख इस सीट पर लगातार चार बार (1989-1998) विजयी रहे। उनके बाद 1998 से अब तक हुए छः चुनावों में मनसुख भाई बसावा यहां से लगातार जीत हासिल कर रहे हैं। वे इस समय भी भरूच लोकसभा सीट से सांसद हैं।
विज्ञापन
आप-कांग्रेस - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

 कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच हुए सीटों के समझौते में गुजरात की भरूच लोकसभा सीट अरविंद केजरीवाल को मिली है। यह वही सीट है जहां से कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल चुनाव लड़ते थे। लेकिन उन्हें भी यहां से अंतिम बार 1984 में जीत मिली थी जब इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पूरे देश में राजीव गांधी और कांग्रेस के प्रति सहानुभूति की आंधी चल गई थी। उसके बाद से अब तक हुए दस लोकसभा चुनाव (एक उपचुनाव सहित) में भाजपा यहां से एकतरफा जीत हासिल करती रही है।
विज्ञापन


भाजपा नेता चंदूभाई देशमुख इस सीट पर लगातार चार बार (1989-1998) विजयी रहे। उनके बाद 1998 से अब तक हुए छः चुनावों में मनसुख भाई बसावा यहां से लगातार जीत हासिल कर रहे हैं। वे इस समय भी भरूच लोकसभा सीट से सांसद हैं। माना यही जा रहा है कि भाजपा अपने इस आदिवासी नेता को एक बार फिर इस सीट पर उतार सकती है। यानी यह सीट विपक्ष के किसी भी उम्मीदवार के लिए लिए भी आसान नहीं रहने वाली थी। ऐसे में यह देखना महत्त्वपूर्ण रहेगा कि इस बार आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार चैतर बसावा यहां से क्या कर पाते हैं।      

आम आदमी पार्टी ने क्यों ली यह सीट 
भरुच लोकसभा सीट में सात विधानसभा क्षेत्र हैें। इनमें से एक सीट डेडियापाडा से इस बार के गुजरात विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार चैतर बसावा ने जीत हासिल की थी। अरविंद केजरीवाल ने इस चुनाव में उन्हें ही आम आदमी पार्टी की ओर से प्रत्याशी घोषित किया हुआ है।
विज्ञापन


आदिवासी नेता चैतर बसावा आदिवासी बहुल सीट डेडियापाड़ा में तो लोकप्रिय हैं, लेकिन पूरे लोकसभा क्षेत्र के स्तर पर उनकी पहचान या  पकड़ नहीं है। लेकिन आम आदमी पार्टी को उम्मीद है कि आदिवासी समुदाय के वोटों और कांग्रेस के परंपरागत वोटों से वह यहां पर बढ़त हासिल कर सकती है। भरुच की मुस्लिम बहुल आबादी भी उसके उम्मीदवार को जिताने में मदद कर सकती है। आम आदमी पार्टी को यहां से जीत मिले तो दिल्ली-पंजाब से बाहर अपनी पहचान बनाने में इसे उसकी बड़ी सफलता के तौर पर देखा जाएगा।

यदि आम आदमी पार्टी को यहां से जीत नहीं भी मिलती है तो चैतर बसावा के रूप में इस क्षेत्र में उसकी पकड़ मजबूत बनेगी। यहां के आदिवासी और मुस्लिम इलाकों में आम आदमी पार्टी को पहचान और पकड़ बनाने में मदद मिलेगी जो आने वाले विधानसभा चुनावों में उसके लिए लाभ का सौदा साबित होगा। माना जा रहा है कि इसी गणित को ध्यान में रखते हुए आम आदमी पार्टी इस सीट को कांग्रेस से लेने के लिए अड़ गई थी। 

आम आदमी पार्टी की परेशानी शुरु
भरुच के स्थानीय पत्रकार बालकृष्ण पांडेय ने अमर उजाला से कहा कि आम आदमी पार्टी की जिद के कारण कांग्रेस ने इस सीट को उसे दे तो दिया, लेकिन अभी से उसके इस निर्णय का विरोध शुरू हो गया है। अहमद पटेल के बेटे फैसल अहमद पटेल और बेटी मुमताज पटेल ने कांग्रेस आलाकमान के इस फैसले को कार्यकर्ताओं के लिए निराशाजनक बताया। कांग्रेस नेतृत्व के इशारे को देखते हुए बाद में उन्होंने इंडिया गठबंधन को मजबूत बनाने के लिए आम आदमी पार्टी उम्मीदवार को सहयोग देने की बात तो कह दी।

बालकृष्ण पांडेय ने कहा कि, लेकिन निचले स्तर पर यह साफ हो गया है कि कांग्रेस कार्यकर्ता चैतर बसावा को सहयोग नहीं करने वाले हैं। इसका आम आदमी पार्टी को को बड़ा नुकसान हो सकता है। परंपरागत सीट होने के कारण भाजपा सांसद और संभावित प्रत्याशी मनसुख भाई बसावा का दावा मजबूत है। आदिवासियों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किए गए काम और मोदी की निजी लोकप्रियता उनके इस दावे को और पुख्ता कर देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें