संसद की सुरक्षा में सेंध को लेकर विपक्ष आक्रमक हो गया है। इस मुद्दे पर चर्चा की मांग पर विपक्षी सांसद अड़े हुए है। घटना के बाद से ही संसद के दोनों सदनों में सत्ता और विपक्ष के सांसदों के बीच जमकर तू-तू मैं-मैं हो रही है। इसी बीच, 'कार्यवाही में व्यवधान' डालने के आरोप में कई विपक्षी सांसदों को संसद के शीतकालीन सत्र की शेष कार्यवाही से निलंबित कर दिया गया है। शुक्रवार से शुरू हुई निलंबन की कार्रवाई में मंगलवार तक 141 विपक्षी सांसदों को सस्पेंड किया गया है। संसद परिसर में विपक्षी सांसदों के हंगामे के बीच, लोकसभा में मंगलवार को भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम को बदलने वाले तीन विधेयकों को लोकसभा में फिर से पेश किया गया।
बता दें अमित शाह ने पिछले हफ्ते लोकसभा में तीन संशोधित आपराधिक कानून विधेयक पेश किए जो आईपीसी, सीआरपीसी और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेंगे। संसद के मानसून सत्र में लोकसभा में पेश किए गए तीन बिलों को गृह मंत्री ने वापस ले लिया हैं। उन्होंने कहा कि बिल वापस ले लिए गए हैं और तीन नए बिल पेश किए गए हैं क्योंकि कुछ बदलाव किए जाने हैं। उन्होंने कहा कि विधेयकों की स्थायी समिति द्वारा जांच की गई थी और आधिकारिक संशोधनों के साथ आने के बजाय, विधेयकों को फिर से लाने का निर्णय लिया गया।
भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता 2023, और भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) विधेयक 2023 का उद्देश्य आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम को प्रतिस्थापित करना है। पहले के विधेयक 11 अगस्त को संसद लोकसभा में पेश किए गए थे, उन्हें स्थायी समिति को भेजा गया था
चर्चा पर रविशंकर प्रसाद ने कहा- नए युग के विधेयक
इन विधेयकों पर चर्चा पर भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि विधेयकों पर विचार विमर्श किया गया है। विधेयकों में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देने की भी सराहना की। यह प्रौद्योगिकी और सूचना का युग है। इस विधेयक में कई प्रावधान डिजिटल रिकॉर्ड, लैपटॉप के उपयोग को बढ़ावा देना सुनिश्चित करते हैं, नए प्रावधानों के तहत परीक्षण डिजिटल रूप से हो सकता है।