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वरुण गांधी: बिखरते बचपन से उबरकर भाजपा के इतिहास में नाम दर्ज कराने वाले नेता

Tue, 16 Apr 2019 05:47 PM IST
ललित फुलारा चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वरुण गांधी
17वीं लोकसभा के लिए पीलीभीत से चुनाव लड़ने वाले वरुण गांधी राजनेता होने के साथ ही कवि भी हैं। वरुण इस वक्त यूपी के सुल्तानपुर से भाजपा सांसद हैं। लेकिन इस बार इस सीट से उनकी मां मेनका गांधी लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं। वरुण गांधी को भाजपा में हिंदुत्व का कट्टर चेहरा माना जाता है। वह अपने विवादित बयानों को लेकर भी सुर्खियां बटोरते आए हैं। हालांकि, पिछले छह-सात साल से वरुण गांधी मीडिया सुर्खियों से एकदम दूरी बनाए हुए हैं। वरुण गांधी भारतीय राजनीति के सबसे पुराने नेहरू-गांधी परिवार से आते जरूर हैं, लेकिन उनकी राजनीति कांग्रेस विरोधी है। जब वरुण तीन माह के थे पिता संजय गांधी का साया सिर से उठ गया। हवाई जहाज दुर्घटना में वरुण ने पिता को खो दिया। चार साल की उम्र में दादी और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का साया सिर से उठ गया। 39 साल की उम्र में वरुण ने जिंदगी के कई रंग-रूप देखे हैं। आइए वरुण गांधी की निजी जिंदगी और राजनीतिक सफर पर एक नजर डालते हैं...
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मेनका गांधी-वरुण गांधी - फोटो : Amar Ujala
वरुण गांधी 13 मार्च 1980 को दिल्ली में पैदा हुए। वरुण की शुरुआती पढ़ाई ऋषि वैली स्कूल, मॉर्डन स्कूल और ब्रिटिश स्कूल से हुई। यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से वरुण गांधी ने अर्थशास्त्र में स्नातक किया। 2011 में वरुण गांधी विवाह बंधन में बंधे। उन्होंने यामिनी रॉय से शादी की और उनकी एक बेटी अनुसुइया गांधी हैं।
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varun gandhi - फोटो : ANI
वरुण गांधी की राजनीतिक शुरुआत मां मेनका गांधी के लिए चुनाव प्रचार से हुई। यह साल 1999 की बात है। उस वक्त वरुण 19 साल के थे और मां मेनका गांधी पीलीभीत से लोकसभा चुनाव लड़ रही थीं। 2009 में वरुण गांधी पीलीभीत से सांसद बनें। 2013 में वरुण अकेले ऐसे सांसद थे जिन्होंने अपनी पूरी सांसद निधि को विकास कार्यों में खर्च किया था। वरुण गांधी को साल 2013 में भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। वह पार्टी के इतिहास में सबसे युवा महासचिव बने। 

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varun gandhi
उन्हें बाद में पश्चिम बंगाल में पार्टी से जुड़े मामलों का प्रभारी भी नियुक्त किया गया। वरुण ने भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए खुले तौर पर जन लोकपाल बिल का समर्थन किया। यहां तक की उन्होंने अन्ना हजार को उनकी भूख हड़ताल के लिए अपना सरकारी आवास देने की बात भी कही। वरुण गांधी नेता होने के साथ ही लेखक एवं स्तंभकार भी हैं। उन्हें राजनाथ सिंह का बेहद करीबी माना जाता है। राजनाथ सिंह ने ही वरुण गांधी को पार्टी का सबसे युवा जनरल सेक्रेट्री नियुक्त किया था। साल 2011 में वरुण गांधी की चार माह की बेटी आद्या की मौत हो गई। इस घटना ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया। 
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वरुण गांधी - फोटो : amar ujala
20 साल की उम्र में साल 2000 में वरुण गांधी का पहला कविता संग्रह आया। इसके  बाद 2015 में उनका दूसरा कविता संग्रह आया। साल 2018 में वरुण गांधी की भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर किताब आई।
 
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