फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

CJI: ‘लोग अदालतों के मामलों से इतने त्रस्त हो जाते हैं कि…’, भारत के मुख्य न्यायाधीश क्यों बोले यह बात? जानें

Sat, 03 Aug 2024 09:16 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने लोक अदालतों के महत्व पर जोर दिया है। उनका कहना है कि लगातार अदालत के चक्कर काटने से लोग तंग आ जाते हैं। इसलिए, वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र के रूप में लोक अदालतों की विशेषता बढ़ जाती है।

विज्ञापन
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने लोक अदालतों के महत्व पर जोर दिया है। उनका कहना है कि लगातार अदालत के चक्कर काटने से लोग तंग आ जाते हैं। इसलिए, वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र के रूप में लोक अदालतों की विशेषता बढ़ जाती है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत में अर्जी लगाने वालों के लिए न्यायिक प्रक्रिया एक सजा की तरह है। इस वजह से वे थकाऊ मुकदमेबाजी को समाप्त करने के लिए समझौते की तलाश में रहते हैं। 

विज्ञापन


‘लोग किसी भी तरह के समझौते को स्वीकार कर लेते हैं’
इस दौरान डीवाई चंद्रचूड़ ने लोक अदालतों में निपटाए गए कई मामलों का भी उदाहरण दिया। उन्होंने एक वाहन दुर्घटना का जिक्र भी किया, जिसमें मजबूत पक्ष होने के बाद भी एक व्यक्ति कम मुआवजे पर मामले को निपटाने के लिए तैयार हो गया था। उन्होंने आगे कहा कि कई मामले ऐसे होते हैं, जहां लोग किसी भी तरह के समझौते को स्वीकार कर लेते हैं क्योंकि उन्हें थकाऊ अदालती प्रक्रिया से बाहर निकलना होता है।  

लोक अदालतों के महत्व पर दिया जोर
विशेष लोक अदालत के एक समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘लोग अदालत के मामलों से इतने त्रस्त हो जाते हैं कि वो किसी भी तरह का समझौता कर लेते हैं…बस कोर्ट से दूर करा दीजिए। एक न्यायाधीश के रूप में हम अक्सर इस समस्या को देखते हैं। यह प्रक्रिया एक सजा की तरह है और ये हम सभी न्यायाधीशों के लिए चिंता का कारण है।’ मुख्य न्यायाधीश ने लोक अदालतों के माध्यम से न्याय देने की प्रक्रिया को संस्थागत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विज्ञापन


कार्यक्रम में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी शामिल हुए
इस कार्यक्रम में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता हमेशा से भारतीय संस्कृति का हिस्सा रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि महाभारत में भगवान कृष्ण ने कौरवों और पांडवों के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश की थी। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें