किसान नेता ने कहा कि पूरे देश में एनएसए कानून को पुराना और अनुपयोगी बताया जा रहा है। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट भी इसकी उपयोगिता को लेकर सवाल खड़े कर चुकी है। इसके बाद भी केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली पुलिस को बिना सबूत किसी को भी हिरासत में लेने का अधिकार देना बेहद गलत है। उन्होंने कहा कि इन कानूनों का दुरुपयोग हो सकता है। लेकिन किसान इससे डरने वाले नहीं हैं और वे आगे भी संघर्ष करते रहेंगे।
दिल्ली पुलिस को मिले इस अधिकार की समयसीमा बहुत महत्वपूर्ण है। दिल्ली पुलिस को ये अधिकार 19 जुलाई से प्रदान किये गए हैं जबकि 22 जुलाई से किसान दिल्ली के जंतर-मंतर पर किसान संसद का आयोजन कर कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं।
इसी बीच, देश के कई मीडिया संस्थानों और पत्रकारों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि इनकम टैक्स की रेड के बहाने सरकार मीडिया, पत्रकारों सहित उन सब पर कार्रवाई कर रही है जो उसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। इस समय में दिल्ली पुलिस को विशेष अधिकार देने से किसानों सहित विपक्ष को भी किसी अनहोनी की आशंका सता रही है।
दिल्ली पुलिस ने बताया सामान्य कार्रवाई
दिल्ली पुलिस के एक डीसीपी स्तर के अधिकारी ने कहा कि यह एक रूटीन कार्रवाई है। 15 अगस्त के आसपास सुरक्षा को देखकर पुलिस को इस तरह के अधिकार दिए जाते रहे हैं। यह अधिकार भी केवल 18 अक्तूबर तक के लिए ही दिया गया है। इसलिए इसमें कुछ भी अनुचित नहीं है।
अधिकार में क्या है
जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि उपराज्यपाल ने नेशनल सिक्योरिटी एक्ट, 1980 की धारा-2 के अंतर्गत दिल्ली पुलिस को किसी को भी गिरफ्तार करने का अधिकार दिया जाता है। यह अधिकार 19 जुलाई से लेकर 18 अक्तूबर तक लागू रहेंगे।