फ्रांस से मुंबई लौटाए गए विमान में 66 गुजराती यात्री सवर थे। लीजेंड एयरलाइंस के इस विमान को डंकी फ्लाइट भी कहा जा रहा है। मामले की जांच अपराध अनुसंधान शाखा (CID) कर रही है। ताजा घटनाक्रम में 66 यात्रियों के बयान दर्ज किए गए हैं। विमान में 303 भारतीय यात्री थे, 27 ने यूरोपीय देश में शरण मांगी और वहीं रुक गए।
मामले की जांच कर रहे सीआईडी-अपराध और रेलवे के पुलिस अधीक्षक संजय खरात ने कहा कि मामले में शामिल होने के संदेह में 15 आव्रजन एजेंटों का विवरण इकट्ठा किया गया है। खरात ने कहा, "विमान में गुजरात के 66 लोग सवार थे। सीआईडी क्राइम ने उनके बयान दर्ज किए हैं। वे अब राज्य में अपने पैतृक गांवों में वापस आ गए हैं।" कुछ नाबालिगों सहित ये 66 मुख्य रूप से मेहसाणा, अहमदाबाद, गांधीनगर और आनंद जिलों से हैं।
यदि डंकी विमानों की बात करें तो यह वो तरीका है जिसमें विमानों के जरिए अवैध विदेश यात्रा की जाती है। खासतौर पर अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन जैसे पश्चिमी देशों में अवैध प्रवासन के लिए इस तरीके का इस्तेमाल किया जाता है ताकि यहां 'शानदार जिंदगी' जी जा सके। अवैध यात्रा के लिए कई बार लोग अपनी जान को भी दांव पर लगाते हैं, जिसमें गैरकानूनी सीमा पार की गतिविधि, जहाजों या कंटेनरों में छिपना तक शामिल है। ऐसी यात्राओं में लोगों के पकड़े जाने और फिर डिपोर्ट करने का भी खतरा रहता है।
...तो फ्रांस में रोकी गई फ्लाइट का मामला क्या है?
21 दिसंबर को मानव तस्करी के संदेह में रोका गया विमान 'डंकी फ्लाइट' का ही उदाहरण है। दरअसल, एयरबस A340 दुबई से उड़ान भरकर निकारागुआ जा रही थी। इस विमान में कुल 303 भारतीय सफर कर रहे थे। विमान फ्यूल भरवाने के लिए फ्रांस के एक छोटे से एयरपोर्ट वैट्री पर रुका था। इसी दौरान फ्रांस पुलिस को खबर मिली थी कि विमान में सफर कर रहे भारतीय मानव तस्करी का शिकार बनने जा रहे हैं। इसके बाद फ्रांस पुलिस टीम एयरपोर्ट पर पहुंच गई और विमान को उड़ान भरने रोक दिया। उसके बाद से रोमानिया स्थित लीजेंड एयरलाइंस का विमान पेरिस से लगभग 150 किलोमीटर पूर्व में वैट्री एयरपोर्ट पर रुका हुआ था। यात्रियों में 11 नाबालिग भी बताए जा रहे थे।