रिपोर्ट में कहा गया कि मुख्य आरोपी मृतक शिवरामन ने लड़कों को धमकी दी कि अगर उन्होंने शिविर के बारे में किसी को कुछ भी बताया तो वह उनकी छोटी अंगुली काट देगा। सब कुछ स्कूल परिसर के अंदर हुआ।
कृष्णागिरी के एक स्कूल में फर्जी एनसीसी शिविर में 12 छात्राओं के यौन शोषण मामले में तमिलनाडु राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (TNSLSA) ने मद्रास हाईकोर्ट को रिपोर्ट सौंपी है। मद्रास हाईकोर्ट ने रिपोर्ट में किए गए दावों पर हैरानी जताई है।
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अधिवक्ता एपी सूर्यप्रकाशम द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश डी कृष्णकुमार और न्यायमूर्ति पीबी बालाजी की पीठ ने कहा कि रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली है। अदालत ने कहा कि टीएनएसएलएसए ने रिपोर्ट में कहा है कि दो दिवसीय फर्जी एनसीसी शिविर में एक प्रशिक्षक ने बंदूक दिखाकर छात्रों को धमकाया था। साथ ही किसी को घटना के बारे में कुछ भी नहीं बताने के लिए कहा था।
रिपोर्ट में कहा गया कि मुख्य आरोपी मृतक शिवरामन ने लड़कों को धमकी दी कि अगर उन्होंने शिविर के बारे में किसी को कुछ भी बताया तो वह उनकी छोटी अंगुली काट देगा। सब कुछ स्कूल परिसर के अंदर हुआ। आयोजकों ने दो बार स्कूल के अंदर कैम्प फायर किया। छात्रों के साथ घुले-मिले। कोर्ट ने विधिक सेवा प्राधिकरण को स्कूल का दौरा करने और छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों के अलावा स्कूल प्रबंधन से बातचीत करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्राधिकरण की टीम ने स्कूल का दौरा करते हुए लोगों से बातचीत के आधार पर रिपोर्ट तैयार की।
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तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता जे रवींद्रन ने कोर्ट को बताया कि अदालत के निर्देश पर सरकार ने स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। स्कूल का जवाब संतोषजनक नहीं था। इस पर कृष्णागिरी के जिला शिक्षा अधिकारी ने निजी स्कूल में प्रशासक नियुक्त करने की सिफारिश की थी। एक-दो सप्ताह में प्रशासक नियुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक महिला कोर्ट के माध्यम से पीड़ित लड़कियों को मुआवजा भी दिया गया है।
महाधिवक्ता पीएस रमन ने कहा कि आरोपी शिवरामन ने चूहे मारने वाली दवा खाकर आत्महत्या की है। स्कूल के प्रिंसिपल और संवाददाता को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। तीन स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। यहां भी फर्जी एनसीसी शिविर आयोजित किए गए थे। इन पर कार्रवाई की जाएगी।
याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता सूर्यप्रकाशम ने कहा कि शिवरामन ने आत्महत्या की या नहीं, इसकी जांच की जानी चाहिए। छात्रों को निजी अस्पताल में मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ित लड़कियों को मुआवजा दिया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई अब 19 सितंबर को होगी।