गौरतलब है कि इस रिपोर्ट में पेगासस सॉफ्टवेयर का लगातार और बड़े स्तर पर दुरुपयोग होने का दावा किया गया। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हैकिंग सॉफ्टवेयर से दुनिया भर में कई सरकारों ने जासूसी कराई, जिनमें 300 से अधिक वेरिफाइड भारतीय मोबाइल नंबर शामिल हैं। इन फोन नंबरों का इस्तेमाल, मंत्रियों, सरकारी अधिकारियों, पत्रकारों, वैज्ञानिकों, विपक्षी नेताओं, व्यापारियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं समेत अन्य कर रहे थे। दावा है कि इन नंबरों से संबंधित कुछ फोन की फॉरेंसिक जांच में साफ संकेत मिले कि 37 फोन पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए निशाना बनाए गए। इनमें से 10 भारतीय थे। माना जाता है कि इस्राइली कंपनी एनएसओ ने यह सॉफ्टवेयर दुनिया की 36 सरकारों को बेचा, लेकिन उसने अपने ग्राहकों की पहचान उजागर नहीं की।
जानकारी के मुताबिक, इस लीक डाटाबेस को पेरिस के नॉन प्रॉफिट मीडिया 'फॉरबिडेन स्टोरीज' और 'एम्नेस्टी इंटरनेशनल' ने एक्सेस किया। उन्होंने ही यह डाटा अन्य मीडिया संस्थानों के साथ साझा किया। इस पड़ताल को 'प्रोजेक्ट पेगासस' नाम दिया गया। फॉरबिडेन स्टोरीज के मुताबिक, इस रिपोर्ट में एनएसओ के ग्राहकों द्वारा चुने गए फोन नंबरों के रिकॉर्ड हैं। इस सूची में पहचाने गए अधिकतर फोन नंबर 10 देशों के हैं। इन देशों में भारत, अजरबैजान, बहरीन, हंगरी, कजाकिस्तान, मैक्सिको, मोरक्को, रवांडा, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में 40 से अधिक पत्रकारों, तीन प्रमुख विपक्षी नेताओं, एक सांविधानिक अधिकारी, केंद्र सरकार के दो मंत्रियों, सुरक्षा संगठनों के वर्तमान व पूर्व अध्यक्ष व कारोबारी की जासूसी की गई। इसके अलावा पेगासस प्रोजेक्ट के डाटाबेस में एक फोन नंबर सुप्रीम कोर्ट के एक वर्तमान न्यायाधीश के नाम पर दर्ज है। हालांकि, रिपोर्ट में यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि डाटाबेस में जब यह नंबर जुड़ा, तब न्यायाधीश उस नंबर का इस्तेमाल कर रहे थे या नहीं।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत में 13 आईफोन की जांच की गई, जिनमें नौ मोबाइल फोन को निशाना बनाने की बात सामने आई। वहीं, इनमें से सात आईफोन में पेगासस सॉफ्टवेयर पाया गया। हालांकि, इस संयुक्त जांच में यह स्पष्ट नहीं हुआ कि जिन नंबरों की सूची लीक हुई है, उनकी जासूसी की गई या नहीं।