फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ओडिशा: जगन्नाथ मंदिर की आखिरी देवदासी का 90 की उम्र में निधन

Sun, 11 Jul 2021 02:49 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, पुरी।

सार

मंदिर के रिकॉर्ड के अनुसार करीब 100 साल पहले मंदिर में 25 देवदासियां थी। वहीं 1980 तक केवल चार देवदासियां हरप्रिया, कोकिलाप्रव, पारसमणि और शशिमणि ही मंदिर में रह गईं थीं। उन तीनों की मौत के बाद केवल पारसमणि ही जीवित बची थीं।
विज्ञापन
जगन्नाथ पुरी मंदिर - फोटो : Social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर की आखिरी जीवित ‘देवदासी’ पारसमणि देवी का वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया। वह 90 वर्ष की थीं।

विज्ञापन


12वीं शताब्दी के इस तीर्थस्थल पर दशकों पहले देवदासी प्रथा समाप्त हो गई थी। पारसमणि लोगों के सहयोग के मंदिर के नगर बलिसाही में किराए के घर में रहती थीं। पारसमणि के दत्तक पुत्र प्रसन्ना कुमार दास न उनका अंतिम संस्कार किया।

देवदासियों का विवाह भगवान जगन्नाथ से हुआ था। भगवान जन्नाथ को ‘दिव्य पति’ के रूप में स्वीकार कर वह पूरे जीवन में कुवांरी रहती थीं। 1955 में एक कानून के जरिये ओडिशा सरकार ने मंदिर का प्रशासन शाही परिवार से अपने हाथ में ले लिया। उसके बाद धीरे-धीरे मंदिर में देवदासी प्रथा समाप्त हो गई।
विज्ञापन


जगन्नाथ मंदिर में नृत्यांगना और गायिका दो प्रकार की देवदासियां होती थीं। पारसमणि गायिका देवदासी थीं। वह भगवान के सोते समय भक्तिमय गीत गातीं थीं। पारसमणि को कुंदनमणि देवदासी ने गोद लिया था। पारसमणि ने अपना देवदासी का प्रशिक्षण महज सात वर्ष की उम्र से शुरू किया था।
विज्ञापन


मंदिर के रिकॉर्ड के अनुसार करीब 100 साल पहले मंदिर में 25 देवदासियां थी। वहीं 1980 तक केवल चार देवदासियां हरप्रिया, कोकिलाप्रव, पारसमणि और शशिमणि ही मंदिर में रह गईं थीं। उन तीनों की मौत के बाद केवल पारसमणि ही जीवित बची थीं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें