इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) से कैंसर मृत्यु दर पर ग्लोबोकैन 2020 डाटा का इस्तेमाल करते हुए शोधकर्ताओं ने अध्ययन के जरिए सुझाव दिया है कि कैंसर बीमारी का समय रहते पता लगाने और इलाज शुरू करने से लाखों लोगों की मौत रोकी जा सकती है। अगर महिलाओं की बात करें तो करीब 15 लाख मौतों को सालाना टाला जा सकता है।
आईएआरसी में कैंसर निगरानी के उप शाखा प्रमुख प्रो. इसाबेल सोरजोमातरम का कहना है कि जब भी महिलाओं में कैंसर की बात आती है तो स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर पर बात होने लगती है लेकिन लोगों को यह भी जानना चाहिए कि हर साल 70 वर्ष से कम उम्र की लगभग तीन लाख महिलाएं फेफड़ों के कैंसर से मर जाती हैं। इनके अलावा 1.60 लाख महिलाओं की मौत कोलोरेक्टल कैंसर से हो रही है। इसके अलावा, कुछ दशकों से कई उच्च आय वाले देशों में महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतें स्तन कैंसर से होने वाली मौतों की तुलना में अधिक रही हैं।
वाणिज्यिक उत्पाद महिलाओं में कैंसर को दे रहा बढ़ावा
अध्ययन में यह भी कहा है कि महिलाओं में कैंसर के कारणों और जोखिम कारकों की अधिक जांच की भी आवश्यकता है क्योंकि पुरुषों में कैंसर के जोखिम कारकों की तुलना में उन्हें कम समझा जाता है। इसके अलावा, महिलाओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले वाणिज्यिक उत्पादों जैसे स्तन प्रत्यारोपण, त्वचा को हल्का करने वाले और बालों को आराम देने वाले उत्पाद भी कैंसर को बढ़ावा देने में योगदान कर रहे हैं।
हाल ही में जारी लैंसेट कमीशन की एक नई रिपोर्ट बताती है कि लैंगिक असमानता और भेदभाव महिलाओं के कैंसर के जोखिम कारकों से बचने के अधिकारों और अवसरों को प्रभावित करते हैं। साथ ही समय पर उनकी जांच और देखभाल में बाधा डालते हैं।