जोर पकड़ रही है प्रफुल्ल पटेल को वापस बुलाने की मांग ...
लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल ने नए बदलावों का जो मसौदा तैयार किया है, उसे केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद लागू कर दिया जाएगा। राहुल के अलावा प्रियंका गांधी और कांग्रेस पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी इस मामले में कूद पड़े हैं। वेणुगोपाल ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर प्रफुल्ल पटेल को वापस बुलाने की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रपति से यह भी आग्रह किया है कि वे प्रफुल्ल पटेल के कार्यकाल में लिए गए फैसलों को रद्द करें।
राहुल गांधी ने लक्षद्वीप प्रशासक एडमिनिस्ट्रेटर के ड्राफ्ट रेगुलेशन के प्रपोजल को जनविरोधी, अलोकतांत्रिक और कठोर करार दिया है। इसके लिए वहां के लोगों की राय भी नहीं ली गई। निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी इस ड्राफ्ट से दूर रखा गया। जानकारों का कहना है कि इतना कठोर कानून वहां पर क्यों लागू किया गया है, जबकि लक्षद्वीप में अपराधों की दर 0.7 फीसदी है। केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, क्या नए कानून के जरिए वहां के लोगों को डराया धमकाया गया है कि वे सरकारी प्रस्तावों पर मौन रहें। केंद्र सरकार की मंशा क्या है। लक्षद्वीप का पारंपरिक ढांचा तोड़कर वहां उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है। अगर यह सब लक्षद्वीप के स्थानीय समुदाय के सांस्कृतिक और धार्मिक तानेबाने पर हमला नहीं हो रहा है तो ये क्या है।
मनमर्जी की हिरासत और दो बच्चों की शर्त, इसका क्या मतलब
ड्राफ्ट में मनमर्जी से हिरासत के अलावा एक दूसरा प्रावधान भी है। अगर पंचायत में किसी सदस्य के दो से अधिक बच्चे हुए तो उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। राहुल गांधी ने लक्षद्वीप के लोगों को अपना समर्थन देते हुए जो ट्वीट किया था, उसमें लिखा कि यह केंद्र शासित प्रदेश 'समुद्र में भारत का आभूषण है' और 'सत्ता में अज्ञानी इसे नष्ट कर रहे हैं'। एनसीआरबी रिपोर्ट 2019 में लिखा है, 2017 में 78, 2018 में 48 और 2019 में 123 आईपीसी के मामले सामने आए हैं। अगर इन मामलों को दूसरे राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के साथ तुलना करें तो इसका प्रतिशत जीरो है।
तीन वर्षों में आईपीसी और एसएलएल, दोनों के केस देखें तो वह संख्या 2017 में 114, 2018 में 77 और 2019 में 182 है। साल 2019 में वहां पर मर्डर का कोई भी केस दर्ज नहीं हुआ। 304 आईपीएस का कोई मामला नहीं आया। सामान्य रोड एक्सीडेंट, हिट एंड रन, मेडिकल लापरवाही से मौत व दहेज का एक भी मामला नहीं आया। गैर-इरादतन हत्या का एक और आत्महत्या के तीन केस सामने आए थे। किसी को शारीरिक नुकसान पहुंचाने की 26 घटनाएं हुई थीं। इनमें से जानबूझकर नुकसान पहुंचाने के 20 मामले दर्ज हुए थे। ड्यूटी में बाधा पहुंचाने के दो मामले, अपहरण का कोई मामला नहीं, महिला छेड़छाड़ के तीन और यौन शोषण की शिकायत पर पुलिस ने एक मामला दर्ज किया था।