निकालेंगे शहीद किसान यात्रा
हालांकि मुख्यमंत्री योगी कह चुके हैं कि वे किसी दबाव में आकर कोई फैसला नहीं लेंगे। साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई होगी। विधानसभा चुनाव निकट हैं, इसलिए भाजपा नेतृत्व उत्तर प्रदेश को केवल योगी के भरोसे नहीं छोड़ सकता। किसानों का आंदोलन उग्र होता जा रहा है। हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भाजपा पदाधिकारियों को घेरा जाने लगा है। संयुक्त किसान मोर्चे के वरिष्ठ पदाधिकारी अविक साहा बताते हैं, केंद्र सरकार को किसानों के आंदोलन की गहराई मालूम हो गई है। लखीमपुर खीरी में किसानों के साथ जो कुछ हुआ है, उसे दुनिया ने देखा है। योगी सरकार को 48 घंटे का समय दिया है। अगर 11 अक्तूबर तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो शहीद किसान यात्रा निकाली जाएगी। इस यात्रा का कार्यक्रम इस तरह से तय किया गया है कि उत्तर प्रदेश का प्रत्येक जिला कवर हो जाए। इसके अलावा दूसरे राज्यों में भी किसान संगठन अलग-अलग अस्थि कलश लेकर लोगों के बीच पहुंचेंगे। ऐसे में भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व कोई पहल कर सकता है।
लखीमपुर खीरी का संदेश केवल यूपी तक सीमित नहीं है। देश का हर किसान इसके साथ जुड़ गया है। वाहनों से कुचल कर किसानों को मार दिया गया। अगर 11 अक्तूबर तक किसानों की मांगें नहीं मानी जातीं तो दशहरे पर पीएम, केंद्रीय गृह मंत्री और स्थानीय नेताओं के पुतले जलाए जाएंगे। उसके बाद 18 अक्तूबर को देश भर में सुबह 10 बजे से 4 बजे तक रेल रोकी जाएगी। 26 अक्तूबर को संयुक्त किसान मोर्चा, लखनऊ में लखीमपुर कांड के विरोध में एक विशाल किसान महापंचायत का आयोजन करेगा। इस घटना ने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार, दोनों के चरित्र को बेनकाब कर दिया है। इतने बड़े हत्याकांड और उसमें भाजपा नेताओं के संलिप्त होने के स्पष्ट प्रमाण होने के बावजूद भाजपा, अपने नेताओं और गुंडों के खिलाफ कोई कदम उठाने के लिए तैयार नहीं है।
किसान आंदोलन के सामने अपने पांव उखड़ते देखकर भाजपा हिंसा पर उतारू हो गई है। किसान संगठन, इस हिंसा का जवाब शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक जन-आंदोलन के जरिए देंगे। निर्धारित समयावधि में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए, हत्या के आरोपी उनके बेटे आशीष मिश्र (मोनू) और उसके सहयोगियों (जिनमें सुमित जायसवाल और अंकित दास के नाम सामने आए हैं) को तुरंत गिरफ्तार करें, ये मांग पूरी नहीं होती हैं तो किसानों का राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू हो जाएगा।