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संजय सिंह से खास बातचीत : जिद्दी है ये सरकार, लखीमपुर खीरी हिंसा पर अजय मिश्र के इस्तीफे से कम कुछ मानेंगे नहीं

Mon, 04 Oct 2021 05:32 PM IST
प्रतिभा ज्योति प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

लखीमपुर खीरी हिंसा को लेकर विपक्षी नेताओं पर पुलिस का पहरा है। विपक्ष के नेताओं को घटनास्थल पर जाने और मृतकों के परिजनों से मिलने पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में यूपी में सियासत गरमाई हुई है। 
 
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आप नेता संजय सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लखीमपुर खीरी कांड से उत्तर प्रदेश की सियासत उबाल पर है। इस कांड ने हर विपक्षी पार्टी को भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर वार करने का एक मौका दिया है। प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव से लेकर कई विपक्षी नेता घटना में मारे गए किसान नेताओं के परिजनों से मिलने जाना चाहते थे लेकिन योगी सरकार ने उन्हें घटनास्थल पर पहुंचने नहीं दिया।
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आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और यूपी मामलों के प्रभारी संजय सिंह भी इसी मकसद से लखीमपुरी खीरी पहुंचना चाहते थे। वे रात में ही लखीमपुर के लिए निकल चुके थे। लेकिन रविवार और सोमवार की दरमियानी रात उन्हें सीतापुर (बिसवां) में रोक दिया गया। जिले के लहरपुर इलाके में वाहनों की चेकिंग के दौरान उन्हें रोका गया। उन्हें भी सीतापुर गेस्ट हाऊस में रखा गया है। अमर उजाला डिजिटल ने संजय सिंह से फोन पर लखीमपुर खीरी की पूरी घटना और किसान आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर बातचीत की। 

सवाल:  क्या आपको भी लखीमपुर खीरी जाने से रोक दिया गया था।

जवाब:  मैं इस कांड में मारे गए किसानों के दुखी परिजनों से मिलने जा रहा था। मुझे जाने नहीं दिया गया। सीतापुर में मुझे रोक कर रखा गया है। न मुझे नजरबंद मान रहे थे और न हिरासत में मान रहे। 11 बजे तक तो मैं अपनी गाड़ी में ही बैठा हुआ था। बाद में कमरे में आया। 
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सवाल:  इस कांड के पीछे आप क्या कारण मानते हैं?

जवाब:  यह सत्ता के अहंकार और अपराधीकरण का उदाहरण है। 25 सितंबर को एक वीडियो आया था, जिसमें केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा किसानों को भड़काते हुए कह रहे हैं कि यदि चुनौती स्वीकार कर ली तो लखीमपुर खीरी छोड़ना पड़ेगा। उन्होंने अपनी बात सही कर दी और किसानों को दुनिया छोड़ने पर मजबूर कर दिया। किसानों को कुचला गया। भड़काऊ भाषण देकर हिंसा के लिए प्रेरित किया गया।
 
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संजय सिंह संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारियों के साथ - फोटो : Twitter : @SanjayAzadSln
सवाल: क्या आपको लगता है कि सरकार तीनों कृषि कानून वापस लेगी?

जवाब: 10 महीने से यह किसान आंदोलन चल रहा है। समझ में नहीं आ रहा कि सरकार की आखिर ऐसी क्या जिद है, यह कैसी जिद्दी सरकार है कि वह तीनों काले कानून वापस नहीं ले रही है। इन कानूनों में कहा गया कि असीमित भंडारण की छूट होगी, इसका मतलब है कि सस्ते में उनसे अनाज खरीदा जाएगा और महंगे दामों में बेचा जाएगा। दूसरी तरफ यह समझिए कि कांट्रैक्ट फॉर्मिंग जो खत्म हो गई थी, उसे मोदी सरकार ने फिर से शुरू कर दिया है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी नहीं दी जा रही है। सरकार का सीधा मकसद यह है कि जिन पूंजीपतियों से वह चंदा लेती है उनके इशारे पर यह कानून लागू किया है और उनके इशारे पर ही कानून को वापिस नहीं ले रही है। 

सवाल: क्या जब तक आपको किसानों के परिजनों से नहीं मिलने दिया जाएगा, आप नहीं लौटेंगे?

जवाब:  मैं सीधी सी बात यह समझता हूं कि इस सरकार को आखिर डर किस बात का है जो विपक्षी नेताओं को जाने से रोका जा रहा है। हम आम लोगों की बात कर रहे हैं, किसानों की बात कर रहे हैं। उनका दुख-दर्द बांटना चाहते हैं तो क्या गलत है? यह सरकार विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश ना करे।

सवाल: विपक्षी नेताओं ने इस घटना की न्यायिक जांच की मांग की थी जिसे योगी सरकार ने मान लिया है। साथ ही मृतकों के आश्रितों को नौकरी,  आरोपियों की गिरफ्तारी, किसानों के परिजनों को 45 लाख का मुआवजा देने की मांग भी मान ली है। आप आगे क्या चाहते हैं?

जवाब:  केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि सारी एजेंसियां उनके दायरे में है। वे हर तरह से जांच को प्रभावित कर सकते हैं। अजय मिश्रा टेनी ने ही कुछ दिन पहले किसानों को धमकाने के अंदाज में कहा था कि लखीमपुर खीरी तक छोड़कर जाना पड़ेगा। उनके विवादित बयान के कारण ही माहौल खराब हुआ।
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