जीत में सबसे ज्यादा योगदान महिलाओं के समर्थन का
किसी भी चुनाव में किसी भी दल की जीत में सबसे ज्यादा योगदान महिलाओं के समर्थन का होता है। इंदिरा गांधी के जमाने में कांग्रेस को देश में महिलाओं का एकमुश्त समर्थन हासिल था, जो बाद में धीरे-धीरे घटता चला गया। 2004 में सोनिया गांधी के नेतृत्व में भी कांग्रेस को महिलाओं का खासा समर्थन मिला था, जो 2009 तक जारी रहा। गुजरात में नरेंद्र मोदी और बिहार में नीतीश कुमार की जीत के पीछे महिलाओं का समर्थन बड़ी वजह माना गया। उड़ीसा में नवीन पटनायक, तेलंगाना में टीआरएस की जीत का भी बड़ा आधार उन्हें महिलाओं का समर्थन मिलना रहा। कभी आंध्र प्रदेश में एनटीआर और बाद में चंद्रबाबू नायडू को भी महिलाओं का भरपूर समर्थन मिला। प. बंगाल में जब तक महिलाओं का समर्थन वाममोर्चे के साथ रहा उसकी जीत सुनिश्चित रही। लेकिन बाद में ममता बनर्जी ने महिलाओं के बीच अपनी अलग जगह बनाई और महिलाओं की ताकत की बदौलत ममता और तृणमूल इसी साल हुए विधानसभा चुनावों तक अजेय बनी हुई हैं।
भारतीय राजनीति के इस यथार्थ को प्रियंका गांधी ने समझ लिया है। इसीलिए उन्होंने उत्तर प्रदेश में लगातार महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण का सवाल उठाया और उन्नाव, हाथरस, लखीमपुर जहां भी महिला उत्पीड़न का कोई मामला सामने आया प्रियंका ने उसे हर तरह से उठाया। अब कांग्रेस की तरफ से चालीस फीसदी विधानसभा सीटों पर महिला प्रत्याशी उतारने की घोषणा से प्रियंका गांधी ने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को नई धार दे दी है। कांग्रेस के इस दांव के दबाव में भाजपा, सपा और बसपा को भी कुछ इसी तरह के कदम उठाने होंगे। अगर वह ऐसा कदम उठाते हैं तो इसका श्रेय प्रियंका गांधी को मिलेगा और अगर वह नहीं उठाते हैं तो कांग्रेस चुनाव प्रचार के दौरान उन दलों और उनके नेताओं को महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर घेरेगी।
कांग्रेस नेताओं को उम्मीद है कि प्रियंका के चेहरे के साथ कांग्रेस जब विधानसभा चुनावों में चालीस फीसदी महिला उम्मीदवारों के साथ मैदान में उतरेगी, तो निश्चित रूप से जाति धर्म और वर्ग की सीमाओं से उठकर महिलाओं का समर्थन उसे मिल सकता है। अगर ऐसा हुआ तो कांग्रेस की सीटें भी बढ़ेंगी और मत प्रतिशत भी। इससे न सिर्फ राज्य में कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस पाने की ओर बढ़ेगी बल्कि लोकसभा चुनावों के लिए भी आधार तैयार होगा। इसके साथ ही अन्य राज्यों में पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ आदि भी चुनावों में कांग्रेस महिलाओं की भागदीरी का यह दांव खेलेगी। साथ ही महिला आरक्षण के लंबित विधेयक को पारित कराने के लिए मोदी सरकार पर दबाव भी बनाएगी। कांग्रेस इस मुद्दे को लोकसभा चुनावों तक जिंदा रखेगी और 2024 के चुनावों में महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा को एक बड़े राष्ट्रीय मुद्दे के रूप में उठाकर मैदान में उतरेगी। इस तरह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की अगुआई में कांग्रेस अब नए सामाजिक एजेंडे की ओर बढ़ रही है जो जाति धर्म से अलग हटकर लैंगिक समानता और हिस्सेदारी का एजेंडा होगा।