दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के ठिकानों पर शुक्रवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने आबकारी घोटाले को लेकर छापा मारा। इस छापे के बाद कहा जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भी एंट्री हो सकती है।
वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से लेकर बंगाल में मंत्री रहे पार्थ चटर्जी तक पर ED की कार्रवाई चल रही है। चटर्जी के ठिकानों पर छापे के दौरान तो ED को करोड़ रुपये नकद मिले थे।
बीते कुछ वक्त से ED के छापे लगातार चर्चा में रहे हैं। आखिर CBI और ED हैं क्या? दोनों किन मामलों की जांच करते हैं? दोनों का अधिकार क्षेत्र क्या है? CBI और ED किन कानूनों के तहत कार्रवाई करते हैं? आइये जानते हैं…
ED क्या है?
प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की नींव 1 मई, 1956 को पड़ी, जब विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1947 (FERA '47) के तहत वित्त मंत्रालय में एक 'प्रवर्तन इकाई' का गठन किया गया। ये इकाई विदेशी विनिमय नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन से जुड़े मामले देखती थी। दिल्ली में हेडक्वॉर्टर के साथ ही मुंबई और कोलकाता में भी इसकी ब्रांच थी।
1957 में ‘प्रवर्तन इकाई’ का नाम बदलकर ‘प्रवर्तन निदेशालय’ कर दिया गया। इसके साथ ही मद्रास में इसकी नई ब्रांच खुली। 1960 में प्रवर्तन निदेशालय का प्रशासनिक नियंत्रण आर्थिक मामलों के विभाग से राजस्व विभाग के पास आ गया। आज भी इसका प्रशासनिक नियंत्रण वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले राजस्व विभाग के पास है।
1991 में जब आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई तो FERA कानून को निरस्त कर दिया गया। 1 जून 2000 को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) ने इसकी जगह ली। 2002 में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (PMLA) आया। एक जुलाई 2005 से ईडी को इस कानून को लागू करने का काम मिला।
आर्थिक अपराध करके विदेश भाग जाने के बढ़ते मामलों को देखते हुए 2018 में सरकार फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर एक्ट, 2018 (FEOA) लेकर आई। 21 अप्रैल 2018 से ईडी को इस कानून के तरह कार्रवाई करने का भी अधिकार मिला।
PMLA क्या है जिसके तहत कार्रवाई करती है ED?
यह आपराधिक कानून मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए और मनी लॉन्ड्रिंग से अर्जित संपत्ति को जब्त करने के लिए लाया गया है। ईडी को पीएमएलए के प्रावधानों को लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए उसे जांच करने, संपत्ति को अटैच करने और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने और विशेष अदालत के आदेश से संपत्ति जब्त करने का आधिकार है।
क्या होती है मनी लॉन्ड्रिंग?
आम भाषा में कहें तो गैर कानूनी तरीकों से बड़ी मात्रा में धन अर्जित करने और उसे फाइनेंशियल सिस्टम में डालने को मनी लॉन्ड्रिंग कहा जाता है। यानी, गैर कानूनी तरीके से कमाई गई ब्लैक मनी को वाइट मनी में बदलने की प्रक्रिया को मनी लॉन्ड्रिंग कहते हैं। इन तरीकों से ही कई बिजनेसमैन, भ्रष्ट अधिकारी, माफिया, नेता करोड़ों से लेकर अरबों रुपए तक के फ्रॉड करते हैं।
PMLA के तहत अब तक कितने मामले दर्ज हुए और कितनों में हुई सजा?
एक जुलाई 2005 को लागू होने के बाद से 31 मार्च 2022 तक PMLA के तहत ईडी 5,422 मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें से सिर्फ 25 लोगों को दोषी ठहराया गया है। यानी, कुल दर्ज मुकदमों के मुकाबले दोषी ठहराए जाने वाले लोगों की संख्या महज 0.46 फीसदी है।
सबसे पहले जानें सीबीआई क्या है?
सीबीआई, कार्मिक विभाग, कार्मिक पेंशन तथा लोक शिकायत मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कार्यरत एक प्रमुख जांच एजेंसी है। यह एक नोडल पुलिस एजेंसी भी है, जो इंटरपोल के सदस्य-राष्ट्रों के अन्वेषण का समन्वयन करती है।
ED और CBI में की जांच में क्या अंतर है?
ईडी एक भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी है, जो मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों पर कार्रवाई करती है। वहीं, सीबीआई एक बहुआयामी, बहु-अनुशासनात्मक केंद्रीय पुलिस, क्षमता, विश्वसनीयता और विधि शासनादेश का पालन करते हुए जांच करने वाली एक विधि प्रवर्तन एजेंसी है। ED की तरह CBI भारत में कहीं भी अपराधों का अभियोजन कर सकती है। हालांकि, ED को जांच के लिए राज्य की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती जबकि, CBI को होती है।
सीबीआई की आवश्यकता क्यों?
अंग्रेजी शासनकाल में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच के लिए 1941 में विशेष पुलिस की स्थापना (स्पेशल पुलिस एस्टैबलिशमेंट-एसपीई) की गई थी। 1946 में इसकी जगह दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम (Delhi Special Police Establishment-DPSE Act) ने ले ली। 1963 में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना का नाम बदलकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation-CBI) कर दिया गया। हालांकि, आज भी सीबीआई का कार्यक्षेत्र 1946 में बने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम से ही निर्धारित होता है।
किन मामलों की जांच सीबीआई करती है?
यह एजेंसी भ्रष्टाचार निरोधी जांच एजेंसी के रूप में शुरू हुई। समय बीतने के साथ इसने पारंपरिक अपराध व अन्य विशिष्ट मामलों की जांच के शुरू की। 1980 के दशक की शुरुआत से संवैधानिक न्यायालयों ने भी खोजबीन और जांच के लिए सीबीआई को मामले भेजने शुरू कर दिए थे।
राहुल पर ED तो सिसोदिया पर CBI का शिकंजा क्यों?
CBI बहुआयामी आपराधिक मामलों की जांच करती है। जबकि,ईडी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों पर कार्रवाई करती है। राहुल गांधी, सोनिया गांधी से लेकर संजय राउत तक पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में कार्रवाई हो रही है। वहीं, मनीष सिसोदिया पर आबकारी नीति में अनियमितता का आरोप है। अगर जांच में मनी लॉन्ड्रिंग की बात सामने आती है तो उनके ऊपर भी ED का शिकंजा कस सकता है।