देश के बड़े उद्योगपति सायरस मिस्त्री का आज एक सड़क हादसे में निधन हो गया। वे टाटा संस के पूर्व चेयरनमैन थे। हालांकि उन्होंने अपने व्यावसायिक जीवन की शुरुआत अपने पिता के व्यवसाय से शुरू की थी। 1991 में पढ़ाई पूरी करने के बाद सायरस भी पिता के व्यापार में उतर गए। वह टाटा ग्रुप में शामिल होने से पहले शापूरजी पालोनजी एंड कंपनी को मैनेजिंग डायरेक्टर थे। मिस्त्री की कंपनी ने टाटा ग्रुप में करीब 18.5 फीसदी हिस्सेदारी खरीद रखी थी। ऐसे में 2006 में सायरस बतौर बोर्ड मेंबर के टाटा एंड संस ग्रुप में शामिल हुए थे। इस खबर में हम बात करेंगे शापूरजी पलोनजी समूह के बारे में। आइये जानते हैं इस कंपनी की कब हुई शुरुआत और कहां-कहां है इसका कारोबार....
1865 में हुई थी कंपनी की शुरुआत
शापूरजी पलोनजी समूह (एसपी समूह) की नींव साल 1865 में पालोनजी मिस्त्री ने रखी थी। तब लिटिलवुड पालोनजी एंड कंपनी बनी थी, लेकिन बाद में पालोनजी ने सायरस के दादा शापूरजी को काम की जिम्मेदारी दी थी। फिर शापूरजी ने पार्टनरशिप तोड़कर शापूरजी पालोनजी कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाई थी। इस समय शापूरजी पालोनजी ग्रुप भारत में सबसे बड़े बिजनेस समूहों में से एक है। यह समूह बीते लगभग 157 सालों से कारोबार कर रहा है।
ग्रुप की 70 देशों में 18 कंपनियां
शापूरजी पलोनजी ग्रुप की दुनियाभर में 18 कंपनियां हैं। यह कुल छह क्षेत्रों इंजीनियर सेगमेंट और कंस्ट्रक्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर, रीयल एस्टेट, वाटर, एनर्जी और फाइनेंशियल सर्विसेज में काम करती है। ग्रुप में 70,000 से ज्यादा कर्मचारी हैं। इस समूह का कारोबार 50 से ज्यादा देशों में फैला हुआ है।
बनाई थी RBI की बिल्डिंग
पालोनजी मिस्त्री के पास आयरिश नागरिकता थी, लेकिन वह अपना ज्यादातर समय भारत में ही रहते थे। सायरस मिस्त्री के पास भी आयरिश नागरिकता थी। उनकी कंपनी ने ही आरबीआई की बिल्डिंग, टाटा समूह की इमारतें, ताज महल टावर, बैंक ऑफ इंडिया और अन्य कई बिल्डिंग्ल बनाईं। बीते साल शापूरजी पालोनजी ग्रुप ने यूरेका फोर्ब्स के तहत अपना कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बिजनेस अमेरिका की एक प्राइवेट कंपनी इक्विटी फंड एडवेंट इंटरनेशनल को बेच दिया था।