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जानिए भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों के बारे में, बड़ा रोचक है उनका इतिहास और अर्थ

Mon, 13 Aug 2018 04:47 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जानिए भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों के बारे में।
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राष्ट्रीय प्रतीक अर्थात भारत की राष्ट्रीय पहचान का आधार। इसकी विशिष्ट पहचान और विरासत का कारण राष्ट्रीय पहचान है जो भारतीय नागरिकों के दिलों में देशभक्ति और गर्व की भावना को महसूस कराता है।

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यहां बहुत सारे राष्ट्रीय प्रतीक हैं जिनके अपने अलग अर्थ हैं जैसे राष्ट्रीय चिन्ह् (चार शेर) शक्ति, हिम्मत, गर्व और विश्वास आदि को दिखाता है, राष्ट्रीय पशु (बाघ) जो मजबूती को दिखाता है, राष्ट्रीय फूल (कमल) जो शुद्धता का प्रतीक है, राष्टीय पेड़ (बनयान) जो अमरत्व को प्रदर्शित करता है, राष्ट्रीय पक्षी (मोर) जो सुन्दरता को दिखाता है, राष्ट्रीय फल (आम) जो देश की उष्णकटिबंधीय जलवायु को बताता है। आप भी जानिए राष्ट्रीय प्रतीकों  के बारे में, बड़ा रोचक है उनका इतिहास और उनका अर्थ।

सबसे पहले भारत का राष्ट्रीय चिह्न 

भारत का राजचिह्न सारनाथ स्थित अशोक के सिंह स्तंभ की अनुकृति है, जो सारनाथ के संग्रहालय में सुरक्षित है। मूल स्तंभ में शीर्ष पर चार सिंह हैं, जो एक-दूसरे की ओर पीठ किए हुए हैं। इसके नीचे घंटे के आकार के पदम के ऊपर एक चित्र वल्लरी में एक हाथी, चौकड़ी भरता हुआ एक घोड़ा, एक सांड तथा एक सिंह की उभरी हुई मूर्तियां हैं, इसके बीच-बीच में चक्र बने हुए हैं। एक ही पत्थर को काट कर बनाए गए इस सिंह स्तंभ के ऊपर 'धर्मचक्र' रखा हुआ है।
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भारत सरकार ने यह चिन्ह 26 जनवरी, 1950 को अपनाया। इसमें केवल तीन सिंह दिखाई पड़ते हैं, चौथा दिखाई नही देता। पट्टी के मध्य में उभरी हुई नक्काशी में चक्र है, जिसके दाईं ओर एक सांड और बाईं ओर एक घोड़ा है। दाएं तथा बाएं छोरों पर अन्य चक्रों के किनारे हैं। आधार का पदम छोड़ दिया गया है। फलक के नीचे मुण्डकोपनिषद का सूत्र 'सत्यमेव जयते' देवनागरी लिपि में अंकित है, जिसका अर्थ है- 'सत्य की ही विजय होती है'।

भारत का राष्ट्रीय संकल्प

भारत मेरा देश और सभी भारतवासी मेरे भाई और बहन है।
मैं अपने देश से प्रेम करता हूँ और मैं इसकी समृद्धि और विभिन्न विरासत पर गर्व करता हूँ।
मैं अवश्य हमेशा इसके लिये योग्य मनुष्य बनने का प्रयास करुँगा।
मैं अवश्य अपने माता-पिता और सभी बड़ों का आदर करुँगा, और सभी के साथ विनम्रतापूर्वक व्यवहार करुँगा।
अपने देश और लोगों के लिये, मैं पूरी श्रद्धा से संकल्प लेता हूँ, उनकी भलाई और खुशहाली में ही मेरी खुशी है।

भारतीय गणराज्य द्वारा भारत के राष्ट्रीय संकल्प के रूप में राजभक्ति की कसम को अंगीकृत किया गया था। सामान्यत: यह संकल्प भारतीयों द्वारा सरकारी कार्यक्रमों में और विद्यार्थीयों द्वारा किसी राष्ट्रीय अवसर (स्वतंत्रता और गणतंत्रता दिवस पर) पर स्कूल और कॉलेजों में लिया जाता है। ये स्कूली किताबों के आमुख पृष्ठ पर लिखा होता है।

इसे वास्तव में पिदिमार्री वेंकटा सुब्बाराव (एक लेखक और प्रशासनिक अधिकारी) ने तेलुगु भाषा में 1962 में लिखा था। इसे पहली बार 1963 में विशाखापट्टनम् के एक स्कूल में पढ़ा गया था। बाद में इसे सुविधा के अनुसार कई क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद किया गया। बैंगलोर, एम.सी चागला की अध्यक्षता में, 1964 में शिक्षा की केन्द्रीय सलाहकार बोर्ड की मीटिंग के बाद इसे 26 जनवरी 1965 से ये स्कूलों में पढ़ा जाने लगा। 

भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर

भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर साका कैलेंडर है।
22 मार्च 1957 में भारत के राष्ट्रीय कैलेंडर के रुप में साका कैलेंडर को अंगीकृत किया गया था जब ये कैलेंडर सुधार कमेटी द्वारा नेपाल संबत से प्रस्तुत हुआ था। ये कैलेंडर साका युग पर आधारित है। इस कैलेंडर की तारीख़ ज्यादातर ग्रेगोरियन कैलेंडर तारीख से मिलती-जुलती है।

साका कैलेंडर को पहली बार आधिकारिक रूप से चैत्र 1, 1879, साका काल, या 22 मार्च 1957 को इस्तेमाल हुआ था। कैलेंडर सुधार कमेटी के प्रमुख (तारा भौतिकविद् मेघनाद साह) और दूसरे सहयोगियों को एकदम सही कैलेंडर बनाने के लिये कहा गया था जिसे पूरे देश के लोग अंगीकृत करें।

भारत की राष्ट्रीय मुद्रा

भारतीय रुपया (ISO code: INR) आधिकारिक रुप से भारत के गणराज्य की करंसी है। भारतीय करंसी से संबंधित मुद्दों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया नियंत्रित करता है। भारतीय रुपये को “र” (देवनागरी व्यंजन) और लातिन अक्षर “R” से चिन्हित किया जाता है जो 2010 में अंगीकृत किया गया। 8 जुलाई 2011 को रुपये के चिन्ह के साथ भारत में सिक्कों की शुरुआत हुई थी। नकली करंसी के बारे में जागरुक करने के लिये आरबीआई ने 'पैसा बोलता है' नाम से एक वेबसाइट की भी शुरुआत की थी।

भारत का राष्ट्रीय पक्षी

सन् 1963 में मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया था क्योंकि यह पूरी तरह से भारतीय संस्कृति और परंपरा का हिस्सा था। मोर शिष्टता और सुंदरता का प्रतीक है। मोर को राष्ट्रीय पक्षी चुने जाने का एक कारण इसका पूरे देश में पाया जाना भी है। हर आम व्यक्ति इस पक्षी से परिचित है। इसके अलावा मोर किसी और देश का राष्ट्रीय पक्षी नहीं है। इन्हीं सब कारणों के चलते मोर को राष्ट्रीय पक्षी बनाया गया।

भारत का राष्ट्रीय पशु

शाही बंगाल बाघ (प्राणी शास्त्र से संबंधित नाम पैंथेरा तिगरीस तिगरीस), भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एकमात्र सबसे बड़े मांसाहारी पशु को भारत के राष्ट्रीय पशु के रूप में स्वीकार किया गया है। इसके शरीर पर चमकदार पीली पट्टी होती है।

ये बड़े आराम से वायुशिफ के जंगलों में दौड़ सकता है और अत्यंत शक्तिशाली, मजबूती और भारत के गर्व का प्रतीक है। ये भारत (आठ नस्ल के) के हर क्षेत्र में पाया जाता है केवल उत्तर-पश्चिम क्षेत्र को छोड़कर।

पूरी दुनिया के बाघों की आधी से ज्यादा जनसंख्या केवल भारत में पायी जाती है। अप्रैल 1973 में, बाघों की सुरक्षा और उनको बचाने के लिये भारतीय सरकार ने 'प्रोजेक्ट टाईगर' की शुरुआत की। इनके विलुप्तप्राय होने से बचाव और सुरक्षा के लिये भारत में 23 टाईगर आरक्षित क्षेत्र बनाये गए हैं। बाघों की अधिकतम उम्र लगभग 20 साल होती है।
 

भारत का राष्ट्रीय फूल

भारत का राष्ट्रीय फूल कमल (वानस्तिक नाम नील्यूम्बो न्यूसीफेरा)।
कमल (वानस्तिक नाम नील्यूम्बो न्यूसीफेरा) एक पावन भारतीय फूल है जिसे भारत के राष्ट्रीय फूल के रुप में अंगीकृत किया गया। भारतीय कला और पुराणों में प्राचीन समय से ही एक अलग प्रतिष्ठा बनायी है इस फूल ने। पूरी दुनिया में ये भारत के पारंपरिक मूल्यों और संस्कृतिक गर्व को प्रदर्शित करता है। ये उर्वरता, ज्ञान, समृद्धि, सम्मान, लंबी आयु, अच्छी किस्मत, दिल और दिमाग की सुंदरता को भी दिखाता है। इसका प्रयोग देश भर में धार्मिक अनुष्ठानों आदि के लिये भी होता है।

भारत का राष्ट्रीय फल

आम (वानस्पतिक नाम मैनजीफेरा इंडिका) को सभी फलों में राजा का दर्जा प्राप्त है। इसकी उत्पत्ति भारत में हुई और 100 से ज्यादा किस्मों के विभिन्न आकार, माप और रंग के उपलब्ध है। इस रसदार फल को भारत के राष्ट्रीय फल के रुप में अंगीकृत किया गया है। इसकी पैदावार भारत के लगभग हर क्षेत्र में होती है।

भारत के कई पौराणिक कथाओं में इसकी ऐतिहासिक मान्यता और महत्व रहा है। कई प्रसिद्ध भारतीय कवियों द्वारा उनकी अपनी भाषा में इसकी तारीफ की गई है। ये विटामिन A, C, और D से युक्त है जो लोगों के स्वास्थ्य के लिये बेहतर होता है।

इसके स्वाद को एलेक्जेंडर और ह्यून सांग द्वारा पसंद किया गया था। ऐसा माना जाता है कि दरभंगा (आधुनिक बिहार) के लगभग सभी क्षेत्र में महान मुगल सम्राट, अकबर के द्वारा लगभग एक लाख आम के पेड़ लखी बाग में लगाये गये थे। दिल्ली में हर साल अंतर्राष्ट्रीय आम दिवस आयोजित होता है जहाँ पर विभिन्न प्रकार के आमों को देखा जा सकता है। दरभंगा में लाखी बाग में मुगल राजा अकबर ने आम के एक लाख (1,00,000) पेड़ लगवाए थे।

भारत का राष्ट्रीय खेल

भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी है। सन् 1928 से 1956, भारत के लिये एक सुनहरा समय था जब भारत ने छ: लगातार जीत के साथ आठ ओलंपिक गोल्ड मेडल जीते थे। अभी तक के भारतीय हॉकी इतिहास में ध्यानचंद सबसे सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी है। उन्हें अभी भी असाधारण गोल करने के कौशल के लिये याद किया जाता है।

हॉकी खेलने के दौरान उन्होंने तीन गोल्ड मेडल (1928, 1932, और 1936 में) जीते। 1948 में, उन्होंने अपना अंतिम अंतर्राष्ट्रीय मैच खेला और पूरे खेल काल में 400 से ज्यादा गोल किये।
 

भारत का राष्ट्रीय वृक्ष है बरगद

भारत का राष्ट्रीय वृक्ष बरगद (वानस्पतिक नाम फिकस बेंगालेंसिस)।
भारतीय बरगद का पेड़ (वानस्पतिक नाम फिकस बेंगालेंसिस) को भारत के राष्ट्रीय पेड़ के रुप में अंगीकृत किया गया है। इसे अविनाशी पेड़ माना जाता है क्योंकि ये अपनी जड़ों से बहुत बड़े क्षेत्र में नए पौधों को विकसित करने की क्षमता रखता है।

भारत में प्राचीन समय से ही ये लंबी आयु का अभिलक्षण और महत्व रखता है। इसकी विशाल शाखाएँ अपने पड़ोसियों को छाँव प्रदान करती है, जबकि इसकी जड़े कई एकड़ों में विस्तारित होती है। इसकी लंबी शाखाएँ, गहरी जड़ें और मजबूत तना एक उलझाव का रुप ले लेता है जिससे किसी दूसरे पेड़ की अपेक्षा लंबे समय तक अस्तित्व में बने रहता है।

ये अपनी लंबी आयु और विशाल छाया के लिये प्रसिद्ध है। कई प्राचीन कहाँनियों में इसके महत्वता का वर्णन किया गया है। ये पूरे राष्ट्र में हर जगह पाया जाता है और सामान्यत: मंदिरों के आसपास और सड़क के किनारों पर लगाया जाता है।


भारत की राष्ट्रीय नदी

गंगा भारत की राष्ट्रीय नदी है। भारतीय आस्थाओं में गंगा को देवी और मां का दर्जा प्राप्त है। हिंदुओं के अनुसार, यह पृथ्वी पर सबसे पवित्र नदी है। वास्तव में, हिंदु लोग इस नदी के तट पर कई अनुष्ठान करते हैं। भारतीय शहर वाराणसी, इलाहाबाद और हरिद्वार इस नदी के कारण प्रसिद्ध हैं। भारत की सबसे लंबी नदी गंगा 2510 कि.मी. पहाड़ों, मैदानों और घाटियों से बहती हैऔर यह देश की सबसे लंबी नदी है।

दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी इस नदी के किनारे बसी है। हिन्दू धर्म के लोगों द्वारा इसे ईश्वर के समान पूजा जाता है और इसके पवित्र जल को कई अवसरों पर इस्तेमाल किया जाता है। हिमालय में गंगोत्री ग्लेशियर के हिमक्षेत्र में भगीरथी नदी के रुप में गंगा की उत्पत्ति हुई। भारतीय महासागर के उत्तर-पूर्वी भाग, बंगाल की खाड़ी में मलत्याग और गंदगी छोड़ने में इसे तीसरी सबसे लंबी नदी के रुप में गिना जाता है।


भारत का राष्ट्रीय जलीय जन्तु
 
भारत का राष्ट्रीय जलीय जन्तु गंगा की डॉलफिन (प्राणी शास्त्र से संबंधित नाम प्लैटानिस्ता गैंगेटिका) को राष्ट्रीय जलचर पशु के रुप में अंगीकृत किया गया है। डॉलफिन एक स्तनधारी जीव है अर्थात् ये बच्चों को जन्म देती है। इसकी लंबी नुकीली नाक और दोनों जबड़ों पर दिखायी देने वाले दाँत बेहद साफ है। इसकी आँखों में कोई लेंस नहीं है। इसका शरीर ठोस और चमड़ा हल्के भूरे रंग का है। मादा डॉलफिन नर डॉलफिन से ज्यादा बड़ी होती है। ये साँस लेने के दौरान आवाज करती है इसलिये इन्हें सुसु भी कहा जाता है। 
 
यह स्तनधारी जलीय जन्तुभारत, बांग्लादेश और नेपाल की नदी गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना, कामफुली और सांगू में पाई जाती है। हालांकि, डॉल्फिन गंगा की प्रजातियाँ का प्रारंभिक विस्तार और अधिक नहीं प्राप्त हुए है।डॉल्फिन गंगा वास्तविक रूप से नेत्रहीन जलीव जीव हैऔर केवल ताजे पानी में रहती है।

 
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भारत का राष्ट्रीय दिवस

स्वतंत्रता दिवस, गांधी जयंती और गणतंत्र दिवस को भारत के राष्ट्रीय दिवस के रुप में घोषित किया गया है। स्वतंत्रता दिवस हर साल 15 अगस्त के दिन मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 1947 में भारतीयों को ब्रिटीश शासन से आजादी मिली थी।

26 जनवरी 1950 को भारत को अपना संविधान प्राप्त हुआ था इसलिये इस दिन को गणतंत्र दिवस के रुप में मनाया जाता है। हर साल 2 अक्टूबर को गाँधी जयंती मनायी जाती है क्योंकि इसी दिन गाँधी का जन्म हुआ था। सभी राष्ट्रीय दिवस को राजपत्रित अवकाश के रुप में पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है।

भारत का राष्ट्रीय ध्वज
बराबर अनुपात (इसे तिरंगा भी कहते है) के तीन रंगों की पट्टी में विभाजित आयताकार क्षैतिज भारतीय राष्ट्रीय ध्वज है। सबसे ऊपरी पट्टी गहरे केसरिया रंग (हिम्मत को प्रदर्शित करता है) का है, बीच मे सफेद रंग (शुद्धता को दिखाता है) है और सबसे नीचे की हरी पट्टी (उर्वरता को दिखाता है)।

बीच की सफेद पट्टी में एक नौसैनिक नीला चक्र है (जिसे धर्म चक्र या कानून का पहिया भी कहते है) जिसके केन्द्र में 24 तिलीयां हैं। इसको अशोक चक्र कहते है। स्वराज ध्वज के आधार पर पिंगाली वैंकैया द्वारा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को तैयार किया गया। 22 जुलाई 1947 के एक मीटिंग में संवैधानिक सभा द्वारा भारत के प्रभुत्व के सरकारी ध्वज के रुप में आधिकारिक तौर पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज के वर्तमान स्वरुप को स्वीकार किया गया था।

कानून के तहत तिरंगे का निर्माण हाथ से काते हुए कपड़े से हुआ है जिसे खादी कहा जाता है। भारतीय ध्वज कानून इसके उपयोग और प्रदर्शनी को नियंत्रण करता है और राष्ट्रीय दिवस को छोड़कर किसी भी निजी नागरिक द्वारा तिरंगे का इस्तेमाल प्रतिबंधित है।

तिरंगे का निर्माण 2009 से कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ द्वारा अकेले ही किया जा रहा है। 1968 में इसके निर्माण के मानक को तय किया गया जबकि 2008 में इसमें बदलाव किया गया, कानून के द्वारा ध्वज के नौ मानक आकार बनाये गये है।
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