जंतर मंतर पर सजी किसान संसद में अब आंदोलनकारियों किसानों का उत्साह कम होने लगा हैं। धीरे धीरे किसान अब प्रदर्शन से दूरी बनाते हुए नजर आ रहे है। जबकि वे प्रदर्शन स्थल होने वाले भाषणों से उब रहे हैं। हालांकि किसान संगठन अपने इस अनोखे प्रदर्शन में रोज नए प्रयोग करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। इसी सिलसिले में किसान सोमवार को महिला संसद का भी आयोजन करने जा रहे है।
रोज 200 नए किसान शामिल हो रहे
दरअसल, किसान संंगठनों ने तय है कि किसान संसद में वे रोज नए किसानों को अपने क्षेत्र की कृषि संबंधी समस्याओं को रखने मौका देंगे। इसलिए हर दिन 200 नए किसान अलग-अलग हिस्सों से इस प्रदर्शन में शामिल होने जुट रहे हैं। वही इसका नेतृत्व हर दिन अलग अलग किसान नेता कर रहे हैं। किसान संगठनों के इस फार्मूले की वजह से हर दिन नए चेहरे धरना स्थल पर नजर आ रहे हैं। इसकी वजह से इन किसानों के बीच में आपसी तालमेल और एकजुटता नहीं बन पा रही है।
नाम न छापने के अनुरोध पर एक किसान नेता ने कहा कि किसान संगठनों के इस फार्मूले की वजह से ही आंदोलन में आक्रामकता नहीं दिखाई दे रही है। हर दिन अलग अलग लोग आते हैं और अपनी मांग रखकर निकल जाते हैं। वहीं सुबह से शाम तक का समय भी लोगों के लिए बहुत कम पड़ रहा है इस दौरान वे कार्यक्रम में अपनी बात रखते हैं वैसे ही प्रदर्शन खत्म हो जाता है। इसलिए भी लोगों का उत्साह कम है।
एक जैसे भाषणों से बोर रहे हैं किसान
जब से जंतर मंतर किसान संसद शुरू हुई है तब से किसान केवल नए कृषि कानूनों की खामियां गिनाने ओर केंद्र सरकार को कोसने का काम रहे हैं। जिस भी किसान को किसान संसद में बोलने का अवसर मिलता है वो नए कानूनों की खामियां निकालने लग जाता है। इससे संसद शामिल होने आए किसान बोर हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि दिन में एक से विषयों पर एक ही तरह के भाषणों से प्रदर्शन स्थल पर बोरियत बढ़ सी गई है। दूसरी तरफ जंतर मंतर प्रदर्शन स्थल भी बहुत छोटा है और यहां सुरक्षा के इंतजाम भी बॉर्डर से ज्यादा है जिसके कारण किसान कही इधर उधर भी नहीं जा सकते हैं।
सोमवार को महिलाओं के हाथ होगी किसान संसद की कमान
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि 26 जुलाई और 9 अगस्त को जंतर मंतर पर 'महिला संसद' चलेगी। हमारी सभी विपक्षी दलों से भी गुजारिश की है कि संसद से वॉक आउट ना करके वहां जनता की आवाज को उठाएं। चाहे किसान आंदोलन का मुद्दा हो या जनता के अन्य कोई मुद्दे। विपक्ष सत्ता पक्ष का मजबूती से विरोध कर रहा है। जो नेता किसानों की बात नहीं करेंगे, वे जब अपने क्षेत्र में जाएंगे तो किसान और वहां की जनता उनका विरोध करेगी। अगर हमारी और जनता की आवाज नहीं उठाई गई तो विपक्ष का भी विरोध किया जाएगा।