अमर उजाला की खास पेशकश 'खबरों के खिलाड़ी' की नई कड़ी में एक बार फिर आपका स्वागत है। हफ्ते की बड़ी खबरों और राजनीतिक विश्लेषण के साथ हम आपके सामने प्रस्तुत हैं। इस चुनावी चर्चा को आप अमर उजाला के यूट्यूब चैनल पर देख सकते हैं।
भारतीय राजनीति के दिग्गज चेहरों में शुमार शरद पवार ने बीते दिनों एनसीपी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। महाराष्ट्र की राजनीति और 2024 के मद्देनजर इस घटना की काफी अहमियत है। इस अहम मुद्दे पर चर्चा के लिए हमारे साथ शुभ्रास्था शिखा, पूर्णिमा त्रिपाठी, सुमित अवस्थी, अशोक वानखेड़े, शिवम त्यागी जैसे विश्लेषक मौजूद रहे। पढ़िए चर्चा के कुछ अंश...
सुमित अवस्थी
'यूपी के बाद सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें महाराष्ट्र में हैं। ऐसे में देश की राजनीति में महाराष्ट्र की काफी अहमियत है। महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे बड़े चेहरे शरद पवार ने बीते दिनों इस्तीफा दे दिया, जिस पर खूब हंगामा हुआ। पार्टी ने नए नेता का चुनाव करने से मना कर दिया है और शरद पवार से इस्तीफा वापस लेने की मांग की जा रही है। वहीं, अजित पवार कह रहे थे कि अगर शरद पवार इस्तीफा देना चाहते हैं तो देने दीजिए। महाविकास अघाड़ी गठबंधन में भी इसे लेकर मतभेद दिख रहे हैं। शिवसेना के संजय राउत जहां शरद पवार के इस्तीफे को बड़ा झटका बता रहे हैं। वहीं, कांग्रेस इसे एनसीपी का अंदरूनी मामला बता रही है। इस पूरे घटनाक्रम को देखकर सवाल उठ क्या महाराष्ट्र की राजनीति में अंदरखाने क्या चल रहा है?'
शुभ्रास्था शिखा
'शरद पवार के इस्तीफे के बाद एनसीपी का घर ऑर्डर में भी आ गया है। एनसीपी में परिवारवाद की समस्या है। अजित पवार को सुप्रिया सुले के नेतृत्व में काम करने में परेशानी हो सकती है। शरद पवार के इस्तीफे के बाद अगर नए नेता का चुनाव होता है तो उन्हें पार्टी के प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल जैसे वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलना भी मुश्किल हो सकता है। जो नेता सामंजस्य बना पाएगा वही सफल होगा।'
अशोक वानखेड़े
'जब शरद पवार ने इस्तीफा दिया था तो उन्हें मालूम था कि वह इस्तीफा वापस लेंगे। यह सिर्फ पार्टी को एकजुट करके पार्टी पर पकड़ बनाने का तरीका है। महाराष्ट्र में शिंदे सरकार भी चलेगी। महाविकास अघाड़ी तभी टूट सकती है, जब एनसीपी टूट सकती है। कांग्रेस वहां लगभग खत्म हो चुकी है। शरद पवार को डर है कि कुछ विधायक पवार से मिलकर आए हैं कि वह ईडी के रडार पर हैं। ऐसे में पवार को कुछ विधायकों के जाने का डर था। इसलिए उन्होंने पार्टी को एकजुट करने के लिए यह सब किया। शरद पवार यूटर्न मास्टर हैं। अजित पवार तभी भाजपा के साथ जाएंगे जब शरद पवार कहेंगे।
'शरद पवार बेटी सुप्रिया सुले को कमान सौंपना चाहते हैं, जिससे अजित पवार को परेशानी हो सकती है। पिछले विधानसभा चुनाव में बेटे पार्थ का चुनाव हारना भी अजित पवार को नाराज कर गया है। एनसीपी में अगर टुकड़े हुए तो बड़ा टुकड़ा अजित पवार के पास रहेगा। हालांकि अजित पवार को आज भी शरद पवार का सुरक्षा कवच हासिल है। अगर शरद पवार सुप्रिया सुले को अध्यक्ष बना भी देते हैं तो अजित पवार, शरद पवार के बाद पार्टी पर अपनी पकड़ बना सकते हैं।'
शिवम त्यागी
'प्रधानमंत्री भी शरद पवार की तारीफ कर चुके हैं। 2024 तक अगर शरद पवार एनसीपी अध्यक्ष रहते हैं तो ये तो शायद वही बता सकते हैं कि वह भाजपा के साथ जाएंगे या नहीं। भाजपा को भी सरकार बनाने के लिए 282 सीटें चाहिए तो कुछ भी हो सकता है। आने वाले दिनों में अजित पवार पार्टी तो तोड़ेंगे ही। शरद पवार की लीडरशिप इतनी बड़ी है कि उनके फैसलों का अनुमान लगा पाना मुश्किल है।'
पूर्णिमा त्रिपाठी
'शरद पवार और एनसीपी कभी भी भाजपा के साथ खड़ी नजर नहीं आई है। प्रदेश स्तर पर अजित पवार की पकड़ मजबूत है और यहां अजित पवार सुप्रिया सुले पर भारी पड़ते हैं। शरद पवार की पार्टी के अगर कुछ विधायक टूट गए होते तो महाविकास अघाड़ी भी टूट गया होता। शरद पवार की कोशिश है कि 2024 तक महाविकास अघाड़ी बना रहे और उनके इस्तीफे को उसी कोशिश से जोड़कर देखा जा रहा है। अब जो भी खेल होगा वो 2024 के मद्देनजर होगा।'