फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Khabron Ke Khiladi: एक तरफ केजरीवाल को जमानत, दूसरी तरफ पार्टी बनी आरोपी, शराब घोटाले में ‘आप’ का क्या होगा?

Sat, 13 Jul 2024 04:33 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। एक तरफ जहां पार्टी के संयोजक और राजधानी के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी है। वहीं प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से चार्जशीट में शराब घोटाले के आरोपियों में पार्टी और पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को शामिल किया गया है। वहीं हमारे खास शो खबरों के खिलाड़ी में तमाम वरिष्ठ पत्रकारों ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है।
विज्ञापन
शराब घोटाले में ‘आप’ का क्या होगा? - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के लिए बीता हफ्ता कभी खुशी, कभी गम लेकर आया। सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को अंतरिम जमानत दे दी। वहीं, ईडी ने नई चार्जशीट में केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को शराब घोटाले के आरोपियों में शामिल कर दिया। अंतरिम जमानत के बाद भी केजरीवाल अभी भी सीबीआई की गिरफ्त में हैं। अरविंद केजरीवाल के लिए आगे की लड़ाई कितनी मुश्किल है? आम आदमी पार्टी को आरोपी बनाए जाने का उनकी राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? इन्हीं सवालों पर इस हफ्ते के ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, राकेश शुक्ल और अवधेश कुमार मौजूद रहे। 

विज्ञापन


समीर चौगांवकर: अरविंद केजरीवाल अभी दो लड़ाई लड़ रहे हैं। एक अदालतों के अंदर और दूसरी जनता की अदालत में। जनता की अदालत का फैसला आने वाले कुछ महीनों में होना है। सुप्रीम कोर्ट में उन्हें लेकर जो टिप्पणी आई है वह अरविंद केजरीवाल के लिए राहत की बात है। मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट में जो राहत मिली उसके बाद आम आदमी पार्टी को लग रहा है कि सीबीआई के मामले में भी उन्हें राहत मिल सकती है। दिल्ली को अगले साल चुनाव में जाना है कई योजनाएं लागू करनी हैं। आप के नेताओं का कहना है कि चुनाव के 60 दिन पहले तक अगर अरविंद केजरीवाल को जमानत नहीं मिलती है तो केजरीवाल इस्तीफा देंगे। इसके बाद पार्टी योजनाएं लागू करेगी। यह मामला सिर्फ अरविंद केजरीवाल ही नहीं आम आदमी पार्टी के भी अस्तित्व का सवाल है। कोर्ट में यह मामला लंबा चलना है। लेकिन जनता की अदालत में फैसला अगले साल की शुरुआत में हो जाएगा। 

विनोद अग्निहोत्री: अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को उन्हीं की कसौटियों पर कसा जाएगा जो खुद उन्होंने तैयार की हैं। जब यह पार्टी बनी तब हर पार्टी के नेता पर उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। तब उनका कहना था कि जिन नेताओं पर आरोप लगते हैं उन्हें नैतिकता के आधार पर पद छोड़ देना चाहिए। अब जब उनके सर्वोच्च नेता पर आरोप हैं, सिर्फ आरोप नहीं गिरफ्तारी हो गई है। इसके बाद भी इस्तीफा नहीं देना भी बड़ा सवाल है। गिरफ्तारी के बाद भी अरविंद केजरीवाल के इस्तीफा नहीं देने के दो कारण हो सकते हैं। पहला जो आप के नेता कह रहे हैं। दूसरा शायद खुद अरविंद केजरीवाल को अपने नेताओं पर उतना भरोसा नहीं है। जितना भरोसा हेमंत सोरेन या लालू प्रसाद यादव को अपनी पार्टी के नेताओं पर था। 
विज्ञापन


राकेश शुक्ल: अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले में फंसे हैं। इस आपदा में वह राजनीतिक अवसर खोज रहे हैं। एक कहावत है कि कौवा कान ले गया। आम आदमी पार्टी दिल्ली की जनता को कान नहीं टटोलने दे रही है बल्कि वो लोगों को कौवे के पीछे दौड़ा रही है। हर बार आम आदमी पार्टी इस मामले में सामने आती है और कहती है अरविंद केजरीवाल राजनीतिक विद्वेष का शिकार हैं। 

अवधेश कुमार: सुप्रीम कोर्ट ने इतनी सुनवाई और बहस के बाद अरविंद केजरीवाल को पूर्ण जमानत नहीं दी बल्कि अंतरिम जमानत दी है। कोर्ट ने इसे एक बड़ी बेंच को ट्रांसफर कर दिया है। इसमें भी कोर्ट ने धारा 19 और धारा 45 का भी जिक्र किया है। यह बहुत गंभीर मामला है। सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला देगी अभी नहीं कहा जा सकता है। दूसरा पहलू यह है कि क्या लोग मानते हैं कि अरविंद केजरीवाल को बेवजह फंसाया गया। हो सकता है कि फंसाया गया हो, लेकिन इसके बाद भी यह आम धारणा है कि नई शराब नीति बनाने में भ्रष्टाचार हुआ है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें