फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Khabron ke Khiladi: नीट पर विपक्ष का रुख कितना सही, सरकार के पास क्या विकल्प, बता रहें हैं खबरों के खिलाड़ी

Sat, 29 Jun 2024 08:44 PM IST
कुमार विवेक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Khabron ke Khiladi: बीते हफ्ते नई लोकसभा का पहला सत्र शुरू हुआ। राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद सदन में नीट पेपर लीक के मामले में जमकर हंगामा हुआ। हंगामे के चलते शुक्रवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो सकी। संसद में जारी इसी गतिरोध पर ही इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चर्चा हुई।
विज्ञापन
खबरों के खिलाड़ी - फोटो : amarujala.com
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बीते हफ्ते नई लोकसभा का पहला सत्र शुरू हुआ। राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद सदन में नीट पेपर लीक के मामले में जमकर हंगामा हुआ। हंगामे के चलते शुक्रवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो सकी। संसद में जारी इसी गतिरोध पर ही इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चर्चा हुई। चर्चा के दौरान वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, समीर चौगांवकर, विनोद अन्निहोत्री, हर्षवर्धन त्रिपाठी, सुनील शुक्ल, पूर्णिमा त्रिपाठी और राखी बख्शी मौजूद रहीं। 

विज्ञापन


पूर्णिमा त्रिपाठी: नीट के मामले को राजनीति से अलग रखकर सत्ता पक्ष और विपक्ष को मिलकर के विचार करना चाहिए था। इस मसले से लाखों छात्र प्रभावित हैं। सरकार का रवैया ढुलमुल रहा है। पहले शिक्षा मंत्री ने एटीए को क्लीन चिट दे दी। फिर कहा कि मैंने जल्दबाजी में ऐसा कह दिया था। इस मामले को सरकार को संजीदा तरीके से लेना चाहिए था। सदन एक ऐसा मंच है जहां चर्चा होगी तो लोगों को सरकार पर भरोसा बढ़ेगा। सरकार को छात्रों को भरोसा देना चाहिए कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। 

राखी बख्शी: यह युवाओं के भविष्य का सवाल है। अब जो नया कानून लागू किया गया है उसमें कई कड़े प्रावधान हैं, लेकिन इसे सख्ती से लागू करना होगा। यह मामला जांच का विषय बन चुका है। जिस तरह से प्रावधान नए कानून में हैं उनका भी इस्तेमाल होना चाहिए। हर आयाम को देखकर इस पर काम करने की जरूरत है। बहुत से युवाओं का भविष्य इससे जुड़ा है, इसलिए इस पर बात होनी ही चाहिए। 
विज्ञापन


रामकृपाल सिंह: परीक्षाओं में जिस तरह से पेपर लीक हो रहे हैं, उसका एक लंबा दौर हो चुका है। दंड किसी चीज का विकल्प नहीं है। सिस्टम ऐसा होना चाहिए कि इस तरह की चीजें संभव ही नहीं हों। कानून यह देखता है कि न्याय हो, किसी को दंड देकर आप न्याय नहीं कर सकते हैं। लोकतंत्र में विपक्ष का सम्मान होना चाहिए। अब जो-जो चीजें निकलकर आ रही हैं वो चौकाने वाली हैं। यह बहुत समय से चल रहा है। इस परीक्षा को रद्द किया जाना चाहिए।

हर्षवर्धन त्रिपाठी: नीट में जो कुछ हुआ है, वह शर्मसार करने वाला है और इसमें सिर्फ और सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी है। नीट का मसला और भी गंभीर हो जाता है। एक रैंकिंग ऊपर होने पर आपको एक लाख रुपये में डिग्री मिल जाएगी और एक रैंकिंग नीचे होने पर एक करोड़ रुपये लग जाएंगे। मुझे लगता है कि नीट का पेपर रद्द होना चाहिए। सरकार को इसका जो दोषी है उसे भी सामने लाना चाहिए।  

सुनील शुक्ल: यह करीब 23 लाख बच्चों के भविष्य का सवाल है। विपक्ष के नेता के रूप में आप इस पर बात नहीं करेंगे तो किस पर बात करेंगे। एनटीए जब से बना है तब से इस पर विवाद है। इस इम्तेहान में लगातार गड़बड़ियां सामने आईं। जब परीक्षा हो रही थी तो छात्र सुदूरवर्ती इलाकों में अपने सेंटर ले रहे थे। तब यह जांच का विषय नहीं होना चाहिए था। पूरी-पूरी परीक्षा संदेह के घेरे में है। मेडिकल की पढ़ाई पर आपका कोई नियंत्रण नहीं है, प्राइवेट कॉलेजों की फीस पर आपका कोई नियंत्रण नहीं है, कोचिंग का सिंडिकेट बन रहा है, उस पर आपका कोई नियंत्रण नहीं है। कल्पना कीजिए उन विद्यार्थियों की जो यह परीक्षा पास कर चुके हैं और उन्हें पता नहीं कि आगे क्या होगा। 

समीर चौगांवकर: एनटीए सरकार ही लेकर आई थी। एनटीए के सदस्यों को देखें तो सभी का ट्रैक रिकॉर्ड बहुत अच्छा रहा है। मुझे लगता है कि एनटीए के गठन में सरकार की मंशा अच्छी थी। एनटीए की साख पर जो बट्टा लगा है वह निश्चित रूप से सरकार के लिए एक झटका है। राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने की जिद से बचना चाहिए। राहुल गांधी राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान इस मामले पर पूरे समय बोल सकते थे। राहुल को यह जिद छोड़ देनी चाहिए थी सिर्फ इसी पर चर्चा हो। विपक्ष यह कह सकता था कि सत्र को दो दिन और बढ़ाकर सिर्फ नीट पर चर्चा हो। सरकार को यह मानने के लिए बाध्य होना पड़ता। मुझे लगता है कि राहुल ने एक अच्छा मौका गंवा दिया। 

विनोद अग्निहोत्री: एनटीए के चेयरमैन जिस-जिस जगह रहे हैं, वहां सवाल उठे हैं। मैं खाली नीट को नहीं मानता पिछले कुछ सालों में पेपर लीक और नकल का इतना बड़ा जाल फैल गया है कि यह बिना बड़े-बड़े शिक्षा माफिया के नहीं हो सकता है। उत्तर प्रदेश में ऐसे-ऐसे नेता है जिनके कई-कई कॉलेज चल रहे हैं। इनमें से कई तो नकल करा करके ही करोड़पति बन गए। राजनीति जनहित से जुड़े मुद्दों पर नहीं होगी तो किस पर होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें