राकेश शुक्ल: इसमें सबसे बड़ा सवाल है कि जितना दोषी इसके लिए तथाकथित पीर है उतना ही दोषी इसके लिए वहां का प्रशासन भी है। तमाम बयान आ रहे हैं कि जिनका धर्म परिवर्तन करने के लिए दबाव बनाया गया क्या उनकी शिकायत ली गई। नहीं ली गई तो क्या उनके खिलाफ कार्रवाई होगी, ये बड़ा सवाल है। इस मामले का खुलासा होने में उत्तर प्रदेश सरकार की भूमिका नहीं है बल्कि, वो शख्स जो उसे छांगुर के खिलाफ लगातार लड़ाई लड़ रहा था और प्रधानमंत्री तक से शिकायक की।
हर्षवर्धन त्रिपाठी: मेरा कहना है कि सबसे पहले छांगुर को बाबा या संत नहीं बोलना चाहिए। ये जाललुद्दीन जो नग अंगूठियां बेचता था उसने ये सब किया। फेक सेक्युरिज्म की बात करने वालों से सवाल पूछना होगा। ये क्यों नहीं तय किया जाता है कि अगर प्रेम विवाह होगा, अगर लड़की हिंदू है तो वो मुस्लिम नहीं बनेगी। प्रशासन को काम करना चाहिए, इतने समय तक कोई इतना बड़ा साम्राज्य बना ले जाता है तो प्रशासन ऊपर से लेकर नीचे तक इसके लिए जिम्मेदार है।
रामकृपाल सिंह: हम लोग कई बार चौंकते हैं, जबकि इसमें कोई नई चीज नहीं है। इस धरती पर जितने भी धर्म हैं उनमें सिर्फ एक धर्म जब पैदा हुआ तब से उसकी फिलॉसिफी है कि ये धरती सिर्फ आपकी है। धर्मांतरण की ये प्रक्रिया कभी रुकी ही नहीं। ईरान, लेबनान सब बदल गया। हिन्दुस्तान में जो भी आज मुस्लिम आबादी है वो कनवर्ट है। जो आदमी एक साइकिल पर कुछ बेचता था वो करोड़ों की प्रॉपर्टी खड़ी कर रहा है और पूरा प्रशासन चुप है।
विनोद अग्निहोत्री: धर्मांतरण एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है। ये कानूनी रूप से भी और नैतिक रूप से भी अपराध है। ये धर्मांतरण मुस्लिम और क्रिश्चनिटी दोनों तरफ से होता है। हमारे धर्म में जो वंचित तबका है, उसके उत्थान पर भी काम करना होगा। जो पार्टी धर्मांतरण का सबसे बड़ी विरोधी है अगर उसके राज में इस तरह के धर्मांतरण हो रहे हैं तो वो उस सरकार पर भी सवाल है। एलआईयू और सेंट्रल इंटेलिंजेस की टीमों पर भी ये सवाल है।