दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। गिरफ्तारी के 50 दिन बाद केजरीवाल बाहर आ गए हैं। केजरीवाल की रिहाई से आम आदमी पार्टी के चुनाव प्रचार को कितना फायदा हो सकता है? केजरीवाल के जेल से बाहर आने के बाद दिल्ली और पंजाब में क्या सियासी समीकरण बनने वाले हैं? इन्हीं सवालों पर इस हफ्ते के 'खबरों के खिलाड़ी' में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, अवधेश कुमार और पूर्णिमा त्रिपाठी मौजूद रहीं।
अवधेश कुमार: कोई भी पार्टी अगर विपक्ष में होती है और भ्रष्टाचार के आरोप में उनका कोई मुख्यमंत्री गिरफ्तार होता है तो वह पार्टी नरेटिव जरूर बनाती है। अभी तक के तथ्यों और जांच को नजरअंदाज करके केवल भाजपा के नरेटिव पर ही सवाल नहीं किया जा सकता है। मूल बात यह है कि क्या अरविंद केजरीवाल को जमानत मिलने से लोकसभा चुनाव पर असर होगा? असर कितना होगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन उनकी पार्टी के उम्मीदवारों का मनोबल जरूर बढ़ेगा।
पूर्णिमा त्रिपाठी: दलीलें जिस तरह से खारिज हुईं हैं, उस पर भी ध्यान देना चाहिए। शर्तों के साथ उन्हें छोड़ा गया, लेकिन घोटाले वाले मामले को छोड़कर वो किसी भी मामले में बोल सकते हैं। अपनी पार्टी का प्रचार करने के लिए वह पूरी तरह स्वतंत्र हैं। विपक्ष की एक मजबूत आवाज के रूप में उनका बाहर आना विपक्ष के मनोबल को जरूर बढ़ाएगा। इसका असर क्या होगा, यह अभी तो नहीं बताया जा सकता है, लेकिन विपक्ष के प्रचार को एक मजबूती जरूर मिलेगी।
समीर चौगांवकर: अरविंद केजरीवाल के बाहर आने के बाद भाजपा को दिल्ली में जरूर चुनौती मिलेगी। पंजाब से भाजपा को ज्यादा उम्मीद नहीं है। वहीं, गुजरात में पहले ही मतदान हो चुका है। जबकि हरियाणा में आम आदमी पार्टी केवल एक सीट पर चुनाव लड़ रही है। ऐसे में सबसे ज्यादा असर दिल्ली में ही पड़ेगा। हालांकि, 2019 में दिल्ली की सातों सीट पर भाजपा को 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे। ऐसे में केजरीवाल के प्रचार से नतीजा बदल ही जाएगा, यह भी अभी से नहीं कहा जा सकता।
विनोद अग्निहोत्री: जिस वक्त यह केस शुरू हुआ था, उस वक्त दो तरफ से इसका विरोध हो रहा था। एक ईडी की तरफ से, दूसरा सत्तापक्ष की तरफ से, अदालत के बाहर भारतीय जनता पार्टी मुखर रूप से उनकी जमानत का विरोध कर रही थी। अदालत के फैसले के बाद सत्ता पक्ष के समर्थकों की टिप्पणियों से लगता है कि केजरीवाल को राहत मिलने से विचलन तो है।
अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी के सबसे बड़े नेता हैं, पार्टी के स्टार कैंपेनर हैं। ऐसे में उनके बाहर आने से आप का मनोबल बढ़ेगा। जहां तक विपक्षी गठबंधन के पोस्टर ब्वॉय होने की बात है तो इस गठबंधन के कई पोस्टर ब्वॉय हैं। इसमें राहुल गांधी, अखिलेश यादव, एमके स्टालिन जैसे नेता हैं, तो उस सूची में अरविंद केजरीवाल भी शामिल हैं। एक तरह से अवधारणा निर्माण में फायदा होगा। यह वोट में कितना तब्दील होगा यह तो 4 जून को ही पता चलेगा।