केरल के विश्वविद्यालयों की नियुक्तियों में भाई भतीजावाद (nepotism) का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसे लेकर सत्तारूढ़ माकपा व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के बीच तल्खी बढ़ गई है। शनिवार को राज्यपाल खान ने कहा कि वे इस मामले की पूर्ण जांच का आदेश देंगे।
राज्यपाल खान का यह बयान तब आया जब उनके और सत्तारूढ़ दल के बीच तनातनी और बढ़ गई है। राज्यपाल ने कुलाधिपति के रूप में अपने अधिकार का उपयोग करते हुए पूर्व राज्यसभा सांसद के के रागेश की पत्नी प्रिया वर्गीज की कन्नूर विश्वविद्यालय में मलयालम की एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति पर रोक लगा दी। वर्गीज को कन्नूर विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर नियुक्त करने से सियासी विवाद पैदा हो गया है।
माकपा नेता रागेश मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के निजी सचिव भी हैं। राज्यपाल ने कहा कि उन्हें राज्य के विश्वविद्यालयों में इस तरह की नियुक्तियों के संबंध में विभिन्न क्षेत्रों से शिकायतें मिली हैं। नई दिल्ली में पत्रकारों से चर्चा करते हुए आरिफ मोहम्मद खान ने कहा, वे 'माकपा' विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों से लेकर निचले स्टाफ तक अपने रिश्ते बनाना चाहती है। लेकिन, अब मैं नियुक्तियों की पूर्ण जांच का आदेश दूंगा।' इस बात की जांच होगी कि बीते दो तीन सालों में ऐसी कितनी नियुक्तियां की गई हैं।
नियुक्ति पर रोक असंवैधानिक : माकपा
उधर, माकपा ने कन्नूर विश्वविद्यालय में मलयालम के एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर विवादास्पद नियुक्ति पर रोक लगाने के राज्यपाल के फैसले को असंवैधानिक बताया है। पार्टी ने इस पद पर वर्गीज की नियुक्ति को लेकर पक्षपात और भाई-भतीजावाद के आरोप को खारिज किया है। रिसर्च में उनके सबसे कम अंक थे, लेकिन इंटरव्यू में सबसे ज्यादा अंक दिए गए थे। इस आधार पर उन्हें नियुक्त किया गया था।
कांग्रेस का राज्यपाल को समर्थन
उधर, कांग्रेस ने राज्यपाल का समर्थन किया है। कांग्रेस नेता और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीसन ने कहा है कि खान ने कन्नूर विश्वविद्यालय में अवैध नियुक्तियां रोकने के लिए अपनी ताकत का इस्तेमाल किया।