हाइ स्पीड ट्रेन (सांकेतिक तस्वीर)
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केरल के मल्लापुरम जिले के तिरुनवाया कस्बे के लोग राज्य सरकार के हाई स्पीड रेलवे लाइन प्रोजेक्ट 'सिल्वरलाइन कॉरिडोर' के विरोध में उतर आए हैं। यह केरल सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इस नई रेलवे लाइन के जरिए 200 किमी की रफ्तार से हाई स्पीड ट्रेन सेवा शुरू की जाएगी। यह कासरगोद को तिरुवनंतपुरम को जोड़ेगा। इसके लिए 529.45 किमी लंबी लाइन बिछाई जाएगी।
तिरुनवाया के लोगों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से क्षेत्र का इको सिस्टम बिगड़ जाएगा। यह इलाका दुर्लभ प्रवासी पक्षियों का आश्रय स्थल है। केरल सरकार व रेल मंत्रालय साझा रूप से सिल्वरलाइन कॉरिडोर का विकास करने जा रहे हैं। इसके लिए एक नया उपक्रम 'केरल रेल डेवलपमेंट कार्पोरेशन' या 'के-रेल' बनाया गया है।
योजना के तहत 529.45 किलोमीटर लंबा सिल्वरलाइन कॉरिडोर बनाया जाएगा। यह कासरगोद को तिरुवनंतपुरम से जोड़ेगा इस कॉरिडोर पर 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चल सकेंगी। केंद्र सरकार ने दिसंबर 2019 में ही इसे सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी।
10 से 12 घंटे का सफर चार घंटे से कम में पूरा होगा
इस कॉरिडोर के निर्माण से कासरगोद से तिरुवनंतपुरम तक का सफर चार घंटे से भी कम समय में पूरा किया जा सकेगा। अभी यह सफर करने में 10 से 12 घंटे लगते हैं। परियोजना को पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। इसकी अनुमानित लागत 63,941 करोड़ रुपये है।
केरल के 11 जिले जुड़ेंगे कॉरिडोर से
सिल्वरलाइन कॉरिडोर से केरल के दक्षिण में कोचुवैली से उत्तर में कासरगोद तक 11 जिले जुड़ेंगे। यह केरल की अब तक की सबसे बड़ी विकास योजना बताई जा रही है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की सरकार का मानना है कि इसके जरिए समूचा केरल विकास के नक्शे पर उभर का आ जाएगा। इसलिए राज्य सरकार इसे हर हाल में लागू करने पर अड़िग है। इससे केरल में पर्यटन व अन्य तमाम कारोबार को भी गति मिलेगी।