केरल के वित्त मंत्री के एन बालागोपाल के गुरुवार को ईंधन में कटौती को लेकर दिए बयान की कांग्रेस और भाजपा ने आलोचना की है। बालागोपाल ने कहा था कि राज्य सरकार के ईंधन पर करों को केंद्र की तरह कम नहीं कर सकता है क्योंकि इससे भारी वित्तीय देनदारियों से जूझ रही सरकार पर और बोझ पड़ेगा।
राज्य के वित्त मंत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि केंद्र का निर्णय केवल अपना चेहरा बचाने की कवायद है और इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 1.5 रुपये और 2.5 रुपये की ही अतिरिक्त कमी आई है।
केरल में इतने रुपये की कमी आई
उन्होंने कहा कि इससे केरल में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 6 रुपये और 12 रुपये की कमी आई है। हालांकि, राज्य उसी तर्ज पर करों को कम नहीं कर सकता है, जैसा कि केंद्र ने किया है क्योंकि केरल सरकार और उसके विभिन्न निकाय जैसे केएसआरटीसी ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण भारी दबाव में है।
मंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार ने कोविड-19 और हाल की आपदाओं से प्रभावित लोगों के लिए कई वित्तीय राहत पैकेज भी शुरू किए हैं और साथ ही महंगाई भत्ते में 6 प्रतिशत की वृद्धि की है। यदि ईंधन की कीमत कम की गई तो इससे सभी कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
भाजपा-कांग्रेस ने घेरा
उन्होंने कहा कि वह राज्य द्वारा करों में किसी भी कटौती को लेकर वास्तविक आंकड़े दिखाएंगे। मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के केरल प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने कहा कि पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा ईंधन पर करों में कटौती करने से इनकार करना बताता है कि ये सरकार जनविरोधी है।
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने भी वाम सरकार की आलोचना की और कहा कि उत्पाद शुल्क में कटौती मामूली थी और राज्य और केंद्र सरकारें टैक्स आतंकवाद फैला रही हैं।