भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने गुरुवार को कोझिकोड में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी की आपूर्ति की। वायरस के इलाज के लिए सरकार के पास एंटीवायरल एकमात्र विकल्प उपलब्ध है, हालांकि इसकी प्रभावकारिता अभी तक चिकित्सकीय रूप से साबित नहीं हुई है।
पुणे स्थित आईसीएमआर के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) ने दो मौतों सहित पांच मामले सामने आने के बाद जिले में ही निपाह वायरस के नमूनों की जांच के लिए अपनी मोबाइल बीएसएल-3 (जैव सुरक्षा स्तर-3) प्रयोगशाला कोझिकोड भेजी थी।
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, आरएमएल अस्पताल और निमहांस के विशेषज्ञों की पांच सदस्यीय केंद्रीय टीम स्थिति का जायजा लेने और निपाह संक्रमण के प्रबंधन में राज्य सरकार की सहायता करने के लिए केरल में तैनात है। निपाह वायरस की मौजूदगी की जांच के लिए चमगादड़ों से नमूने एकत्र किए जाएंगे।
केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि एंटीवायरल की स्थिरता पर एक केंद्रीय विशेषज्ञ समिति के साथ चर्चा की गई है। उन्होंने राज्य और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच परामर्श का हवाला देते हुए कहा, आगे के कदम या कार्रवाई विशेषज्ञ समिति द्वारा तय की जाएगी।'
आईसीएमआर की एमबीएसएल-3, दक्षिण एशिया की पहली जैव सुरक्षा स्तर-3 रोकथाम मोबाइल प्रयोगशाला है, जो जिले में ही संक्रमण की शुरुआती जांच और पता लगाने में मदद करेगी।
इसके अलावा, राजीव गांधी जैव प्रौद्योगिकी केंद्र (आरजीसीबी) की एक पूरी तरह से सुसज्जित मोबाइल वायरोलॉजी परीक्षण प्रयोगशाला को वायरस परीक्षण और पहचान को मजबूत करने के लिए उत्तरी केरल जिले में भेजा गया था। यह चौथी बार है जब राज्य में वायरल संक्रमण की पुष्टि हुई है। 2018 और 2021 में कोझीकोड में और 2019 में एर्नाकुलम में इसका पता चला था।