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Kerala: सीएम विजयन ने RSS से माकपा के संबंध होने के दावे को किया खारिज, कांग्रेस पर निशाना साधा

Tue, 10 Sep 2024 11:01 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

Kerala: केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने माकपा और आरएसएस के बीच संबंध के दावों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि आरएसएस ने माकपा कार्यकर्ताओं की हत्या की। उन्होंने कांग्रेस पर भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने बाबरी मस्जिद मामले में कपिल सिब्बल से पैरवी न करवाकर आरएसएस के प्रभाव को स्वीकार किया।
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पिनरई विजयन - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने मंगलवार को कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बीच संबंध होने का जो प्रचार किया जा रहा है, वह पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहे हैं। लेकिन वास्तव में आरएसएस से किसके संबंध हैं, ये सबको पता है। विजयन ने कहा, केरल में माकपा कार्यकर्ताओं की सबसे ज्यादा हत्या आरएसएस ने की है। हमें आरएसएस को खुश करने की कोई जरूरत नहीं है। हम सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई में कभी पीछे नहीं हटे, भले ही हमें अपने कार्यकर्ताओं की जान गंवानी पड़ी हो। 

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विजयन ने केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) के प्रमुख पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्होंने खुद सार्वजनिक रूप से माना है कि उनका आरएसएस से संबंध है। माकपा एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा, राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का आरएसएस के साथ क्या संबंध था? 1984 में आरएसएस प्रमुख मधुकर दत्तात्रेय देवरस का नाम इतना मशहूर क्यों हुआ? यह इतिहास सभी को पता है कि राजीव गांधी ने उनके साथ एक चुनावी समझौता किया था। 1986 में राजीव गांधी ही थे, जिन्होंने आरएसएस के दबाव में बाबरी मस्जिद को पूजा के लिए खोलने का फैसला लिया और वहां रामलला की मूर्ति स्थापित की। तो वास्तव में आरएसएस से किसके संबंध थे? किसके मन में आरएसएस के प्रति नरमी है?



मुख्यमंत्री विजयन ने कहा, 2018 में कांग्रेस ने अपने वकील कपिल सिब्बल से बाबरी मस्जिद मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड की पैरवी करने से मना किया था। यह मांग क्यों की  गई? क्या यह नहीं दिखाता कि कांग्रेस आरएसएस की मानसिकता से कितनी प्रभावित है? बाबरी मस्जिद स्थल पर नींव रखी जा रही थी, तब राहुल गांधी ने भगवान राम की प्रशंसा की थी। प्रियंका गांधी ने अयोध्या में भूमि पूजन को राष्ट्रीय एकता का काम बताया था। कांग्रेस नेताओं ने राम जन्मभूमि मंदिर के लिए बड़ी-बड़ी ईंटें भेजीं थीं। भूमि पूजन के दौरान मध्य प्रदेश में तो कमलनाथ के नेतृत्व में हनुमान चालीसा का पाठ हुआ, जो उस समय राज्य के मुख्यमंत्री थे। अब कांग्रेस कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में सत्ता में है। वहां क्या स्थिति है? राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दिन कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने अपने नियंत्रण वाले 34,563 मंदिरों में विशेष पूजा करने का आदेश दिया था। हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने उनस दिन सार्वजनिक अवकाश का एलान किया। तेलंगाना में कांग्रेस के मौजूदा नेता कभी एबीवीपी और आरएसएस के नेता थे। क्या इन सबको पुरानी बातें कहकर टाला जा सकता है?
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उन्होंने कहा, हाल ही में राजस्थान से भाजपा के एक सदस्य निर्विरोध चुने गए। यही मुद्दा हमने पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान उठाया था। केसी वेणुगोपाल उस समय राज्यसभा सदस्य थे और उनके इस्तीफे से खाली सीट के लिए यह चुनाव हुआ था। हमने तभी कहा था कि इस इस्तीफे से भाजपा को सीट मिल जाएगी। क्या वहीं नहीं हुआ? क्या कांग्रेस एक विपक्षी पार्टी होने के बावजूद वहां उम्मीदवार खड़ा नहीं कर सकती थी? इसका क्या मतलब है?

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