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Kerala: सीएए के खिलाफ केरल सरकार उठाएगी कानूनी कदम, राज्य कैबिनेट का फैसला; जानें पूरा मामला

Wed, 13 Mar 2024 07:36 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

नागरिकता संशोधन अधिनियम(सीएए) के कार्यान्वयन के खिलाफ केरल सरकार कानूनी कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा एक आधिकारिक बयान जारी किया गया है। 
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केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
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विस्तार
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नागरिक संशोधन अधिनियम(सीएए) के कार्यान्वयन के खिलाफ केरल में बढ़ते विरोध के बीच मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट ने बुधवार को विवादास्पद अधिनियम के खिलाफ कानूनी कदम उठाने का फैसला किया है। 
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केरल सरकार उठाएगी सीएए के खिलाफ कानूनी कदम
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में मुताबिक, महाधिवक्ता को मामले में कानूनी कार्यवाही शुरू करने का काम सौंपा गया है। राज्य सरकार ने पहले ही संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक मुकदमा दायर कर दिया है। चूंकि केंद्र सरकार सीएए के तहत नियमों की अधिसूचना के साथ आगे बढ़ी है, राज्य सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

भाजपा और केरल सरकार में रार
बयान में सरकार की स्थिति की भी पुष्टि की गई कि केरल में नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू नहीं किया जाएगा। केंद्र द्वारा इस अधिनियम को अधिसूचित करने के बाद से केरल में सत्तारूढ़ सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले एलडीएफ और विपक्षी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ द्वारा कानून के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन देखा जा रहा है। 
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आखिर क्या है नागरिकता संशोधन कानून?
नागरिकता संशोधन विधेयक से अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अवैध प्रवासियों को नागरिकता के लिए पात्र बनाने के लिए नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन किया गया है। नागरिकता संशोधन विधेयक 9 दिसंबर 2019 को लोकसभा में प्रस्तावित किया गया था। 9 दिसंबर 2019 को ही विधेयक सदन से पारित हो गया। 11 दिसंबर 2019 को यह विधेयक राज्यसभा से पारित हुआ था।

नए कानून में क्या प्रावधान हैं? 
नागरिकता अधिनियम में देशीयकरण द्वारा नागरिकता का प्रावधान किया गया है। आवेदक को पिछले 12 महीनों के दौरान और पिछले 14 वर्षों में से आखिरी साल 11 महीने भारत में रहना चाहिए। कानून में छह धर्मों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) और तीन देशों (अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान) से संबंधित व्यक्तियों के लिए 11 वर्ष की जगह छह वर्ष तक का समय है। कानून में यह भी प्रावधान है कि यदि किसी नियम का उल्लंघन किया जाता है तो ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्डधारकों का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।
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