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केरल विधानसभा चुनाव: करुणाकरण की विरासत पर बेटी पद्मजा को भरोसा

Wed, 04 May 2016 04:24 PM IST
सुदीप ठाकुर/अमर उजाला,त्रिशुर।
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केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहे के करुणाकरण की बेटी पद्मजा वेणुगोपाल अपने बंगले में स्थित पिता करुणाकरण और मां की समाधि के पास। - फोटो : amar ujala
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शाम के छह बजे रहे हैं और केरल के इस तीसरे बड़े शहर की तंग सड़कों पर ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति है। शहर के कुनंगनन इलाके में सड़क के किनारे स्थित इस बंगले में कोई हलचल नजर नहीं आती। यदि बंगले के बाहर कांग्रेस का झंडा और लगा होर्डिंग नजर न आए तो पता ही नहीं चलता कि यह केरल के लंबे समय तक मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहे के करुणाकरण की बेटी और यहां से कांग्रेस उम्मीदवार पद्मजा वेणुगोपाल का घर है।
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मुरली मंदिरम नामक यह बंगला पद्मजा को पिता से विरासत में मिला। वह यहीं पली बढ़ी हैं और अब अपने परिवार के साथ यहीं रहती हैं। पद्मजा के पति राजनीति में नहीं हैं। वह डॉक्टर हैं। 

बंगले के भीतर अलबत्ता कुछ करीबी कार्यकर्ता मैडम के बाहर निकलने का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें जनसंपर्क के लिए निकलना है। पैंतालीस वर्ष के करीब की पद्मजा बाहर निकलती हैं तो उनके चेहरे पर ताजगी नजर आती है। 
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केरल की राजनीति को प्रभावित करने वाले नायर समुदाय से है पद्मजा
लगता है आप जीत के प्रति काफी आश्वस्त हैं। यहां गर्मी बहुत है। दिन भर घर पर थीं क्या? इस सवाल पर वह थोड़ा झिझकती हैं। फिर कहती हैं, 'नहीं मेरा दिन सुबह साढ़े पांच बजे शुरू हो जाता है। हां यहां गर्मी बहुत है। 41 डिग्री तक टेम्परेचर है। आज दिन में भी मैंने जनसंपर्क किया था। कई कालोनियों में गई।' 

त्रिशुर मंडलम यानी विधानसभा क्षेत्र मुख्यतया शहर में केंद्रित है और शहर से सटी कुछ बस्तियां भी इसमें आती हैं। डेढ़ लाख के करीब मतदाता हैं जिनमें मध्य वर्ग की संख्या काफी है। वैसे इस क्षेत्र में केरल की राजनीति को प्रभावित करने वाले नायर समुदाय की काफी संख्या हैं। पद्मजा भी इसी समुदाय से हैं।

केरल में कांग्रेस की राजनीति को प्रभावित करने वाले शराब के मुद्दे को वह खारिज कर देती हैं। कहती हैं, 'यहां यह कोई मुद्दा नहीं है। त्रिशुर सीट ही नहीं, यूडीएफ इस बार कमबैक करेगा।' आपको लोग वोट क्यों देंगे? क्या सिर्फ इसलिए कि आप करुणाकरण की बेटी हैं?

इस पर उनका कहना था, 'मेरे पिता ने यहीं से राजनीति शुरू की थी। यहीं से जीतकर वे मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री बने। मैं खुद कई वर्षों से यहां काम कर रही हूं। 1991 से यह सीट कांग्रेस के पास है। पिछली बार यहां से थरमबिल रामकृष्ण विजयी हुए थे।' 



लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं पद्मजा
पद्मजा इससे पहले लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुकी हैं, लेकिन नाकामयाब रहीं। वह प्रदेश कांग्रेस की महासचिव भी हैं। बातचीत के बीच ही उनके साथ मौजूद उनकी बहन के लड़के और उनके विश्वसनीय कार्यकर्ता मनीष बताते हैं कि इसी बंगले में करुणाकरण और उनकी पत्नी की समाधि बनी हुई है।

असल में नायर समुदाय में मृत्यु के बाद अपने घर पर ही अंत्येष्टि करने और फिर उस जगह पर समाधि बनाने की परंपरा रही है। मनीष कहते हैं कि पहले लोगों के पास काफी जगह होती थी। अब ऐसा संभव नहीं है।

अमर उजाला के साथ मुलाकात के इस सिलसिले को खत्म करने से पहले पद्मजा बंगले के बाईं ओर स्थित छोटे से बगीचे की ओर ले जाती हैं, जहां करुणाकरण और उनकी पत्नी की समाधि बनी हुई है। 
पद्मजा के मुकाबले सीपीआई के उम्मीदवार सुनील कुमार खड़े हैं।

पिछली बार वह कइपमंगलम सीट से विधायक चुने गए थे। यहां कांग्रेस के भीतर चांडी और एंटनी गुटों के बीच भीतरी झगड़ा भी है। यह देखना वाकई दिलचस्प होगा कि क्या वह करुणाकरण की राजनीतिक विरासत हासिल कर पाती हैं।
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