भाजपा युवा मोर्चा के नेता प्रवीण नेट्टारु की हत्या के सिलसिले में एनआईए ने बड़ा कदम उठाया है। एनआईए ने इस मामले में प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पूर्व जिला सचिव तुफैल एमएच को गिरफ्तार किया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने रविवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भाजपा युवा नेता प्रवीण नेट्टारु की पिछले साल हत्या कर दी गई थी। प्रवीण की हत्या में पीएफआई की ‘हिट टीम’ का सदस्य तुफैल फरार था। उसे बंगलूरू में उसके ठिकाने से दबोचा गया।
एनआईए ने बताया कि विभिन्न स्रोतों से विश्वसनीय सूचना मिलने पर एक टीम शनिवार देर रात बंगलूरू शहर के अमरुथाहल्ली इलाके स्थित एक ठिकाने से तुफैल को पकड़ने में कामयाब रही। उन्होंने बताया कि भाजपा युवा मोर्चा नेता नेट्टारु की हत्या मामले में तुफैल वांछित था। नेट्टारु की जुलाई 2022 को दक्षिण कन्नड़ जिले में सुल्लिया तालुका के बेल्लारी गांव में पीएफआई सदस्यों ने हत्या कर दी थी। जनवरी में एनआईए ने छह फरार आरोपियों समेत 20 लोगों के खिलाफ बंगलूरू की विशेष अदालत में आरोपपत्र दायर किया था।
जांच एजेंसी ने कहा कि एक विशेष समुदाय के नेताओं की हत्या की पीएफआई की साजिश में तुफैल ने अहम भूमिका निभाई थी। उसने उन तीन हमलावरों को कोप्पा गांव के आशियाना रेजीडेंसी में छिपने में मदद की थी जिन्होंने रेकी कर नेट्टारु की हत्या कर दी। तुफैल 2016 में कुशलनगर ग्रामीण में प्रशांत पुजारी की हत्या और 2012 में मदिकेरी ग्रामीण में विश्व हिंदू परिषद के नेता गणेश की हत्या के प्रयास में भी आरोपी है।
बजरंग दल कार्यकर्ता के हत्यारों को थी हिंदुओं के प्रति नफरत : एनआईए
एनआईए ने हाल ही में एक विशेष अदालत के समक्ष आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोप पत्र में कहा गया है कि इस साल फरवरी में यहां बजरंग दल के एक कार्यकर्ता की हत्या के आरोपियों को हिंदू समुदाय के प्रति नफरत थी।
कर्नाटक में हिजाब विवाद के बीच, बजरंग दल के कार्यकर्ता हर्ष की हत्या कर दी गई थी। आरोपपत्र में कहा गया है, जांच से पता चला है कि सीएए-एनआरसी के मुद्दे, हिजाब विवाद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की गोरक्षा गतिविधियों के दौरान आरोपियों को हिंदू समुदाय से नफरत पैदा हो गई थी। इन कारणों से, आरोपियों ने हिंदू समुदाय के लोगों के बीच भय पैदा करने और शिवमोगा शहर में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा करने की साजिश रची। आरोप पत्र के मुताबिक, आरोपी शिवमोगा में जुलूस, समारोहों के दौरान हिंदू समुदाय के प्रमुख नेताओं की आवाजाही पर नजर रख रहे थे। उन लोगों ने एक प्रमुख हिंदू नेता के रूप में हर्ष पर नजर रखी और उनकी हत्या के लिए हथियार जुटाए।