बेलगावी के भीमप्पा गुंडप्पा की याचिका में दावा किया गया था कि पिछले वर्ष कुछ विधायकों और मंत्रियों द्वारा शपथ लेने के दौरान तीसरी अनुसूची के तहत संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है, जिसके तहत उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। कर्नाटक हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया हैं।
संविधान में अनिवार्य के बजाय कुछ व्यक्तियों के नाम पर विधानसभा के सदस्यों की शपथ की पवित्रता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि बुद्ध, बसवेश्वर और डॉ बी आर आंबेडकर को दिव्य अवतार माना जाता है। संविधान में इनका इस्तेमाल 'ईश्वर' के प्रतीक के रूप में किया जाता है। याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की दलीलों से हम आश्वस्त नहीं हैं कि शपथ निर्धारित प्रारूपों की आवश्यकता का अनुपालन नहीं करती हैं।
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मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि तीसरी अनुसूची में सांविधानिक प्रावधानों में प्रयुक्त अंगेजी शब्द 'गॉड' लगभग उसी को दर्शाता हैं। साथ ही कहा कि कन्नड़ में कहा गया है कि देवनोब्बा, नाम हलवु जिसका अर्थ है कि ईश्वर एक हैं, जिन्हें हम भिन्न-भिन्न रूपों से जानते हैं। साथ ही बृहदारण्यक उपनिषद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एकम् सत् विप्रा बहुधा वदन्ति जिसका मतलब है सत्य एक हैं, ज्ञानी व्यक्ति उन्हें विभिन्न नामों से बुलाते हैं।
बेलगावी के भीमप्पा गुंडप्पा की याचिका में दावा किया गया था कि पिछले वर्ष कुछ विधायकों और मंत्रियों द्वारा शपथ लेने के दौरान तीसरी अनुसूची के तहत संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है, जिसके तहत उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि भगवान का नाम लिए बिना भी शपथ ली जा सकती है। यह ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है कि शपथ भगवान के नाम पर या भगवान का नाम लिए बिना पूरी प्रतिज्ञा के साथ ली जा सकती है।