कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर
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कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों ने न केवल कर्नाटक में सत्ताधारी भाजपा सरकार को हिला दिया है बल्कि अब पार्टी में मतभेद भी पैदा होने लगे हैं। बंगलूरू के तीन निजी अस्पतालों ने स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर के लिए 15 फीसदी बेड ब्लॉक कर दिए हैं। जिसके बाद भाजपा नेताओं समेत बंगलूरू के विधायकों ने इस पर आपत्ति प्रकट की है।
येलहांका से भाजपा विधायक एसआर विश्वनाथ, कांग्रेस विधायक ब्यर्थि सुरेश, कृष्ण बायर गौड़ा और कुछ अन्य ने इसे लेकर मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और राजस्व मंत्री आर अशोक से चर्चा की है। बीते शनिवार को एक कोविड केयर सेंटर का निरीक्षण करते हुए अशोक ने इस मामले पर कहा था कि बंगलूरू खुद बढ़ते मामलों का सामना कर रहा है और मैं स्वास्थ्य मंत्री द्वारा ऐसे किसी कदम की सिफारिश नहीं करूंगा।
अशोक का रुख जहां कुछ नरम था, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव एमपी रेणुकाचार्य ने सुधाकर पर बरसते हुए कहा, उन्हें (सुधाकर को) चिक्कबल्लापुर में ऐसी व्यवस्थाएं करने दीजिए। मैं पहले भी मंत्री को गैरजिम्मेदाराना बयान देने के खिलाफ चेतावनी दे चुका हूं और न केवल सुधाकर बल्कि मैं ने सीपी येगेश्वर से भी कहा है कि दिल्ली में केवल बैठे कर खेल मत खेलिए। मेरे लिए जनसेवा महत्वपूर्ण है। अगर लोग वोट करते हैं तो हम विधायक बनके हैं और तबह मंत्री बन सकते हैं। अगर वह लोगों की सेवा नहीं कर सकते तो उन्हें क्यों स्वास्थ्य बनना चाहिए।
पूर्व उपमुख्यमंत्री और बंगलूरू विधायक रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि सुधाकर को याद रखना चाहिए कि वह केवल चिक्कबल्लापुर के स्वास्थ्य मंत्री नहीं हैं। वह पूरे कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री हैं। मुख्यमंत्री को मामले में दखल देनी चाहिए, चिक्कबल्लापुर समेत सभी जगह के लोगों को बेड मिलने चाहिए।
इससे पहले सुधाकर ने सफाई देते हुए कहा था कि 100 बेड को आरक्षित किए गए हैं वो उनके विधानसभा क्षेत्र चिक्कबल्लापुर से बंगलूरू के एस्टर अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए हैं। 30 अप्रैल को जारी एक आदेश के अनुसार, एस्टर सीएमआई, कोलंबिया एशिया और बैप्टिस्ट अस्पतालों को चिक्कबल्लापुर के मरीजों के लिए 15 फीसदी बेड आरक्षित करने के लिए कहा गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने इसके लिए नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया है।