11 दिन पेड़ पर बिताने के बाद युवक को एक आइसेलेशन सेंटर पर पहुंचाया गया, जो उसके घर से करीब सात किलोमीटर दूर है। वहां उसने एक दिन गुजारा और रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उसे घर भेज दिया गया। 15 मई को उसकी पॉजिटिव कोविड रिपोर्ट आई थी।
कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद एक 18 वर्षीय आदिवासी युवा ने एक पेड़ पर अपने लिए 'आइसोलेशन बेड' बना लिया और 11 दिन तक उसी पर रहा। युवक का नाम रामावत शिवा नायक है और वह नालगोंडा जिले की एक आदिवासी बस्ती का रहने वाला है। उसने कहा, 'हमारे पास और कोई रास्ता नहीं था। हमारा पांच लोगों का परिवार है और रहने के लिए एक कमरा। उनकी सुरक्षा के लिए मैंने पेड़ पर रहने का फैसला किया।'
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कोरोना संक्रमित होने की बात पता चलने के बाद पहला दिन उसने अपने घर के बाहर खुले में गुजारा। शिवा ने कहा, 'जब में वहां था, तब मेरे दिमाग में पेड़ पर बिस्तर बनाने का विचार आया। मैंने बिस्तर को रस्सी की मदद से टहनियों से बांध दिया, जिससे वह गिरने न पाए।' उसने बताया कि इस दौरान उसने अपना समय किताबें पढ़ते हुए और संगीत सुनते हुए व्यतीत किया।
शिवा ने कहा कि नौवें दिन उसे बेहतर महसूस होने लगा था। कोठानंदीकोंडाएक छोटी आदिवासी बस्ती है जो हैदराबाद से करीब 166 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां करीब 500 घर हैं और यहां का नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पांच किलोमीटर दूर है। शिवा ने बताया कि गांव के करीब 50 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं और सुविधाओं के अभाव में कई लोगों को आइसोलेट होने में समस्या हुई है।
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हैदराबाद के पतनचेरू में एक कॉलेज में बीए की पढ़ाई कर रहे शिवा वे कहा कि मेरी मां पेड़ के नीचे खाना रख देती थी और आवाज लगा देती थी। मैं नीचे जाकर खाना खा लेता था। पिछले साल लगे लॉकडाउन के दौरान घरवालों की मदद के लिए उसने दिहाड़ी मजदूर का काम शुरू किया था। उसने कहा कि मैं मनरेगा के तहत भी पंजीकृत हूं। मुझे दो दिन और आराम करने के लिए कहा गया है, उसके बाद दोबारा से काम शुरू कर दूंगा।