कर्नाटक हाई कोर्ट ने शिक्षा विभाग के खिलाफ अदालत की अवमानना याचिका को खारिज किया है। साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि शिक्षा को व्यावसायिक गतिविधि नहीं बनने दिया जा सकता। हाईकोर्ट ने यह आदेश आदिशक्ति सेवा ट्रस्ट, मांड्या की याचिका पर दिया है। ट्रस्ट ने एकल न्यायाधीश के आदेश के बावजूद विभाग पर अपने स्कूल की स्थिति को उन्नत नहीं करने का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की थी।
अवमानना याचिका मांड्या के निर्देश उप निदेशक एच शिवरामू के खिलाफ दायर की गई थी। एकल न्यायाधीश पीठ ने 21 अगस्त, 2023 को ट्रस्ट की याचिका को स्वीकार कर लिया था। साथ ही विभाग को कानून के अनुसार उसके आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया था।
याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की खंडपीठ ने कहा कि विभाग ने स्कूल के आवेदन को खारिज कर दिया था क्योंकि उसके पास आवश्यक प्रयोगशाला, पुस्तकालय या खेल का मैदान नहीं था। इसमें अग्नि सुरक्षा उपायों का भी अभाव था। हाईकोर्ट ने कहा कि वह याचिकाकर्ता को बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दे सकता।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि उचित सुविधाओं और सुरक्षा उपायों के बिना स्कूल स्थिति में उन्नयन की मांग कर रहा था, जिसे अनुमति नहीं दी जा सकती।
ओबीसी को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित सिफारिशें स्वीकार
कर्नाटक कैबिनेट न्यायमूर्ति के भक्तवत्सल आयोग की पांच में से तीन सिफारिशों को गुरुवार को स्वीकार कर लिया है। ये सिफारिशें शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए एक तिहाई या 33 प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित हैं। कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एच के पाटिल ने इस संबंध में जानकारी दी।
बता दें कि शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अध्ययन करने के लिए कर्नाटक हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश भक्तवत्सल की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया गया था। इस आयोग ने पिछले साल तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
ये तीन सिफारिशें की गई स्वीकार
कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एच के पाटिल ने कहा कि भक्तवत्सल आयोग ने पांच सिफारिशें की हैं। उनमें से तीन को कैबिनेट ने स्वीकार कर लिया है। इनमें आगामी चुनावों में कुल सीटों में से एक तिहाई (33 प्रतिशत) राजनीतिक आरक्षण की नीति प्रदान करना जारी रखना है। दूसरी सिफारिश, अन्य पिछड़ा वर्ग के व्यक्तियों के पक्ष में बीबीएमपी (ब्रुहत बेंगलुरु महानगर पालिका) में मेयर और डिप्टी मेयर के पद पर आरक्षण प्रदान करने से संबंधित है। वहीं, तीसरी सिफारिश सभी शहरी स्थानीय निकाय चुनाव विंग्स को कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग (डीपीएआर) के नियंत्रण में लाना है।