कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु आमने-सामने है। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को कहा, राज्य ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) को एक याचिका दायर की है। जिसमें तमिलनाडु को नदी का पानी छोड़ने के आदेश की समीक्षा की मांग की है।
सीडब्ल्यूएमए ने शुक्रवार को कर्नाटक से 15 अक्टूबर तक तमिलनाडु को प्रतिदिन 3,000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा, जबकि राज्य ने कहा था कि पर्याप्त पानी नहीं है। राज्य के जल संसाधन मंत्री शिवकुमार ने हालांकि कहा कि कावेरी बेसिन के जलाशयों में पानी का प्रवाह 15,000 क्यूसेक तक बढ़ना राहत का संकेत है।
उन्होंने कहा, शनिवार दोपहर को ही हमने एमएन वेंकटचलैया (भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश) सहित वरिष्ठ पूर्व न्यायाधीशों द्वारा दिए गए सुझावों के बाद समीक्षा की मांग करते हुए प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के समक्ष एक याचिका दायर की।
पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, मुझे आज सुबह एक रिपोर्ट मिली है। मैं दिन में दो से तीन बार जांच कर रहा हूं। आज प्रवाह 15,000 क्यूसेक है। यह अभी के लिए अच्छी खबर है। शिवकुमार ने आगे कहा, केआरएस बांध के नीचे के इलाकों जैसे मांड्या, कोल्लेगला, हनुरू और अन्य में हाल की बारिश भी दर्ज की जा रही है (टीएन की ओर प्रवाह के हिस्से के रूप में)। इसलिए पिछले तीन-चार दिनों में एक रिकॉर्ड बना है।
हमारे द्वारा केआरएस से पानी नहीं छोड़ने के बावजूद 6,500 क्यूसेक (टीएन की ओर) तक प्रवाह होता है, इसलिए यदि अधिक बारिश होती है, तो यह हमें मजबूत करेगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि जो कानूनी लड़ाई जरूरी है वह जारी रहेगी।
तमिलनाडु को पानी छोड़े जाने के खिलाफ किसान और कन्नड़ समर्थक संगठन राज्य के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस संबंध में एक सप्ताह में दो बंद बुलाए गए थे।