पाकिस्तान और चीन अपनी सेना के बेड़े में लाख इजाफा करें, भारत एक ऐसी तकनीकि पर काम कर रहा है कि दुश्मन की मिसाइलें तो दूर, परिंदा भी देश में पर नहीं मार सकेगा। भारत 'काली 5000' नाम की तकनीकि पर काम कर रहा है। यह ऐसा हथियार है कि अदृश्य तरंगों के जरिए दुश्मनों के लड़ाकू विमानों, रॉकेट और मिसाइलों को पल में खाक कर देगा। कहा तो यह तक जा रहा है कि इस तकनीकि से अंतरिक्ष में तैर रहे उपग्रहों को भी निशाना बनाया जा सकेगा। भारत की इस तकनीकि से दुनिया का हर देश खौफजदा है।
विज्ञापन
दुश्मनों की मिसाइलों को हवा में ही खाक कर देगा भारत का अदृश्य ब्रह्मास्त्र 'काली 5000'
2 of 5
क्या है 'काली 5000' ?
काली यानी किलो एम्पियर लीनियर इंजेक्टर को अदृश्य तरंगो वाला ब्रह्मास्त्र कह सकते हैं। काली 5000 वह तकनीक है जिसके जरिए लेजर जैसी अदृश्य बीम से हमला करके दुश्मनों के हथियारों को हवा में ही नष्ट किया जा सकेगा। मसलन, दुश्मन की मिसाइलें, लड़ाकू विमान, यहां तक कि अंतरिक्ष में उपग्रहों को भी मार गिराया जा सकेगा।
विज्ञापन
दुश्मनों की मिसाइलों को हवा में ही खाक कर देगा भारत का अदृश्य ब्रह्मास्त्र 'काली 5000'
3 of 5
भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर और डीआरडीओ मिलकर 'काली 5000' को बना रहे हैं। फिलहाल इस तकनीकि का इस्तेमाल अन्य कार्यों में हो रहा है। भविष्य में इस तकनीकि के जरिए अंतरिक्ष में जासूसी की जा सकेगी और दुश्मन के संचार और रॉकेट मिसाइल तंत्र को घर बैठे ठप किया जाकेगा।
दुश्मनों की मिसाइलों को हवा में ही खाक कर देगा भारत का अदृश्य ब्रह्मास्त्र 'काली 5000'
4 of 5
मीडिया खबरों के मुताबिक अब तक काली 80, काली 200, काली 1000, काली 5000 और काली 10000 नाम के प्रोटो टाइप बनाए जा चुके हैं। इनका विकास कार्य जारी है। 2004 में सेना ने काली 5000 बेड़े में शामिल कर लिया था।
दुश्मनों की मिसाइलों को हवा में ही खाक कर देगा भारत का अदृश्य ब्रह्मास्त्र 'काली 5000'
5 of 5
इस तरह की तकनीकि दुनिया में फिलहाल किसी भी देश के पास नहीं है। हालांकि अमेरिका दावा करता रहा है कि वह लेजर प्रणाली वाले हथियारों पर काम कर रहा है। लेकिन काली महज लेजर हथियार भर नहीं है। काली 5000 मिशन 1985 में भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर डॉक्टर आर चिदंबरम ने पेश किया था। 1989 में आधिकारिक तौर इस तकनीकि पर काम करना शुरू कर दिया गया था।