जज पुष्पा गनेडीवाला ने दिया इस्तीफा
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पोक्सो कानून के तहत यौन उत्पीड़न की विवादित व्याख्या (स्किन टू स्किन कॉन्टैक्ट) करने वाली बॉम्बे हाई कोर्ट की जज पुष्पा गनेडीवाला ने अपना कार्यकाल पूरा होने से एक दिन पहले बृहस्पतिवार को इस्तीफा दे दिया है। इस मामले में उनकी व्याख्या की काफी आलोचना हुई थी। पिछले कुछ महीनों में वह अपने अजीबो गरीब फैसलों को लेकर चर्चा में थीं।
जस्टिस गनेडीवाला फिलहाल अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर हाईकोर्ट की नागपुर पीठ की अध्यक्षता कर रही थीं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने न ही उनकी सेवा में विस्तार किया और न ही उन्हें प्रोन्नति दी।
जनवरी और फरवरी 2021 में विवादित फैसला सुनाने के बाद शीर्ष अदालत की कॉलेजियम ने जस्टिस गनेडीवाला को स्थायी जज बनाने या अतिरिक्त जज के तौर पर एक साल के सेवा विस्तार पर की गई सिफारिशों को वापस ले लिया था।
साफ था कि जस्टिस गनेडीवाला को 12 फरवरी, 2022 को उनके अतिरिक्त जज के तौर पर कार्यकाल समाप्त होने पर वापस जिला न्यायपालिका में जिला सत्र न्यायाधीश के पद पर पदावनत किया जा सकता था। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है।
दरअसल, जस्टिस गनेडीवाला ने एक विवादित फैसला देते हुए अपने आदेश में कहा था कि किसी हरकत को यौन हमला माने जाने के लिए गंदी मंशा से त्वचा से त्वचा (स्किन टू स्किन) का संपर्क होना जरूरी है। उन्होंने अपने फैसले में कहा कि महज छूना भर यौन हमले की परिभाषा में नहीं आता है।