लगभग पैंतालिस साल की हो चुकीं कृष्णा यादव ने बताया कि अपना अचार बनाने के लिए उन्होंने दादी-नानी के उन्हीं नुस्खों को आजमाया जिन्हें उन्होंने बचपन से अपनी मां के द्वारा अचार बनाते हुए देखा था। अपने खेतों से पैदा हुई फसलों गाजर, टमाटर, गोभी और आंवला के अचार उन्होंने बेहद सादगी से बनाए। कोई नुकसानदायक तत्त्व नहीं मिलाया। तेल की उतनी ही मात्रा डाली जितना कि लोग अपने घर बनाने में इस्तेमाल किया करते हैं।
लोगों ने उनके अचार को खाया तो बड़ी-बड़ी कंपनियों के अचार खाना छोड़ दिया। उनकी इसी सादगी ने उनके हौंसले को उड़ान दिया। सफलता मिलती गई तो उनके काम का विस्तार होने लगा। उन्होंने और अधिक खेत किराए पर लिया और अपनी ही जैसी महिलाओं को जोड़ने लगीं। अपने ही खेतों की ताजा फसल से उन्होंने अचार की नई-नई किस्में विकसित कीं। बाद में आसपास के बाजारों में बेचने का काम शुरु किया जो बाद में बेहद सफल साबित हुआ।
इसके बाद तो उन्हें थोक में ऑर्डर मिलने लगे। उनकी सफलता आज भी नहीं रुकी है। आज वह चार कंपनियों की मालकिन हैं और उनकी कंपनियों का करोड़ों का टर्नओवर है। कृष्णा ने बताया कि आज उनकी कंपनी में हजारों महिलाएं काम कर रही हैं। वे सबको मेहनत और ईमानदारी से काम सिखाती हैं और उन्हें अपना काम शुरु करने की राह बताती हैं।
रविवार को दिल्ली में अमर उजाला द्वारा प्रकाशित पुस्तक स्वस्थ धरा, खेत हरा का लोकार्पण कृषिमंत्री राधामोहन सिंह के हाथों किया गया। इस अवसर कृष्णा यादव को किसान गौरव सम्मान से नवाजा गया।
कृष्णा यादव के अलावा शहद की खेती से सफलता पाने वाले गंगा नगर के राकेश कुमार, इंटीग्रेटेड फार्मिंग से घाटे की खेती को लाभ के सौदे में तब्दील करने वाली सीतापुर लखनऊ की सुधा तोमर, गोबर गैस से अपने पूरे गांव को मुफ्त गैस उपलब्ध कराने वाले पंजाब के दिलबर सिंह और मछली पालन के लिए त्रिपुरा के लालचंद सरकार को भी किसान गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया।